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CMHO Bribe Case – वाइस सेम्पल देने से पहले बीमार हुए CMHO

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रिश्वत काण्ड: अखिलेश बाबू चला रहे कार्यालय

CMHO Bribe Caseबैतूल सीएमएचओ रिश्वत काण्ड की परते लगातार खुलती जा रही हैं। इस काण्ड में कार्यालय से जुड़े कई कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। लोकायुक्त की टीम ने लैब टैक्रीशियन को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा तो कई और भी परते खुली। जिसकी जांच लोकायुक्त की टीम कर रही है।

सबसे खास बात यह है कि सहायक ग्रेड-3 लिपिक अखिलेश मालवीय की भूमिका भी बेहद संदेहपूर्ण सामने आई है। लोकायुक्त इनको लेकर भी जांच कर रही है कि आखिर रिश्वतकाण्ड में इनकी क्या भूमिका थी? हालांकि शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि रिश्वत की पहली किश्त 50 हजार रुपए की राशि उन्होंने अखिलेश मालवीय के हाथों में ही दी थी। इधर लोकायुक्त द्वारा वाइस सेम्पल के लिए सीएमएचओ को किए गए तलब के दौरान सीएमएचओ बीमार हो गए हैं और उन्होंने लोकायुक्त पहुंचने के लिए मोहलत देने पत्र लिखा है।

बीमार हुए सीएमएचओ डॉ. सुरेश बौद्ध | CMHO Bribe Case

लोकायुक्त टीआई मनोज पटवा से सांध्य दैनिक खबरवाणी की चर्चा में उन्होंने बताया कि सीएमएचओ डॉ. सुरेश बौद्ध को वाइस सेम्पल के लिए शुक्रवार को भोपाल कार्यालय बुलाया था लेकिन वे नहीं आए। डॉ. बौद्ध ने लोकायुक्त को पत्र लिखकर बताया कि उनकी तबीयत बिगड़ गई है।

वाइस सेम्पल के लिए कुछ दिनों की मोहलत दी जाए। श्री पटवा ने बताया कि वाइस सेम्पल से सीएमएचओ की आवाज का मिलान किया जाएगा जो शिकायतकर्ता और उनके बीच हुई थी। इधर सूत्रों का कहना है चूंकि डॉ. बौद्ध स्वयं चिकित्सक है इसलिए वाइस सेम्पल देने से पहले अपना गला खराब भी कर सकते हैं ताकि वाइस का मिलान ना हो सके।

कौन है अखिलेश मालवीय?

पिछले लंबे समय से स्वास्थ्य महकमे में लायजनिंग करने वाले एक बाबू का नाम उछलकर सामने आ रहा है। यह नाम अखिलेश मालवीय जिनका पद सहायक ग्रेड-3 है। महकमे में यह पद बहुत छोटा होता है लेकिन चिरापाटला जैसे गांव में पोस्टिंग होने के बाद यह बाबू पिछले लंबे समय से सीएमएचओ कार्यालय में अटैच है। इतना ही नहीं इन पर आरोप है कि सीएमएचओ के द्वारा निरीक्षण के दौरान जिन पर दबाव बनाया जाता है उनकी लायजनिंग इनके द्वारा की जाती है।

इस आरोप की पुष्टि शिकायतकर्ता डॉ. सागर पाटनकर ने भी की है। डॉक्टर पाटनकर का कहना है कि रिश्वत की पहली किश्त 50 हजार रुपए 28 अप्रैल को इनके के ही हाथों में दी गई। डॉक्टर पाटनकर का कहना है कि सीएमएचओ ने बोला था कि इनको रुपए दे दो और उनके चेम्बर के बाजू वाले कमरे में यह बैठे थे जहां पर यह राशि इन्हें दी गई थी।

फोटो देखते ही पहचान गए डॉ. पाटनकर | CMHO Bribe Case

जब शाहपुर में एक टीम ने लैब टैक्रीशियन को ट्रेप किया उसी दौरान दूसरी टीम बैतूल सीएमएचओ कार्यालय में पहुंची थी जिसने सबसे पहले अखिलेश मालवीय को बुलवाया था और अपने पास बैठाकर रखा था। डॉक्टर सागर पाटनकर का कहना है कि बैतूल वाली लोकायुक्त की टीम ने अखिलेश मालवीय की फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर भेजी थी और उन्होंने शाहपुर की टीम ने जैसे ही दिखाई उन्होंने तुरंत अखिलेश मालवीय को पहचान लिया।

डॉक्टर पाटनकर का यह भी आरोप है कि रिश्वत की दूसरी किश्त 10 हजार रुपए सीएमएचओ के चेम्बर में जाकर सीएमएचओ के बताए स्थान पर रख दिए थे।

रमेश खाड़े की भूमिका पर भी नजर

रिश्वत काण्ड में एक चौथा नाम भी सामने आया है जिसकी भूमिका पर लोकायुक्त की पैनी नजर है। दरअसल सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ लिपिक रमेश खाड़े चिकित्सक, तृतीय श्रेणी कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की स्थापना का प्रभार देखते हैं। हालांकि इनका ट्रांसफर हो चुका है लेकिन इन्हें भी रिलीव नहीं किया गया है।

लोकायुक्त टीआई मनोज पटवा ने बताया कि रमेश खाड़े को भी नोटिस भेजा गया था और उनके बयान दर्ज कराए हैं। हालंाकि उन्होंने इस काण्ड से अपनी भूमिका से इंकार किया है। बावजूद इसके श्री पटवा का कहना है कि इनकी भूमिका पर लोकायुक्त जांच कर रही है और इनसे दस्तावेज मंगाए है इसकी भी जांच कर रहे हैं।

कलेक्टर के आदेश पर हटे थे मालवीय | CMHO Bribe Case

चिरापाटला में पदस्थापना के बाद सीएमएचओ कार्यालय में अटैच बाबू अखिलेश मालवीय की लगातार शिकायत आने पर कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने इन्हें हटाने के निर्देश दिए थे और इन्हें हटा दिया गया था लेकिन हटने के कुछ दिन बाद ही सीएमएचओ डॉ. सुरेश बौद्ध ने इन्हें पुन: सीएमएचओ कार्यालय बुला लिया और इनको लीगल शाखा का प्रभारी बना दिया गया।

इसको लेकर सवाल उठता है कि आखिर अखिलेश मालवीय में ऐसी क्या योग्यता थी कि कलेक्टर के निर्देश की अवहेलना करते हुए उनका पुन: अटैचमेंट हो गया। जब रिश्वतकाण्ड में उनका नाम आया तो सांध्य दैनिक खबरवाणी ने अखिलेश मालवीय से चर्चा तो उनका कहना था कि उन्होंने रुपए नहीं लिए। डॉक्टर सागर पाटनकर उनके पास आए थे। चूंकि वह परिचित थे तो उन्होंने साहब से उनको मिलवा दिया था। जो आरोप लग रहे हैं वह गलत है।

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