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अर्चना चिटनिस के सतत प्रयासों एवं किसानों की अथक मेहनत से केले को मिला जीआई टैग, दुनिया में बनेगी विशिष्ट पहचान

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खबरवाणी

अर्चना चिटनिस के सतत प्रयासों एवं किसानों की अथक मेहनत से केले को मिला जीआई टैग, दुनिया में बनेगी विशिष्ट पहचान

बुरहानपुर। जिले के लिए यह ऐतिहासिक गौरव और उपलब्धि का क्षण है कि जिले के प्रसिद्ध केले को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है। इससे केला अब राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। यह सफलता किसानों की अथक मेहनत विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) के दीर्घकालिक एवं सतत प्रयासों का परिणाम है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्रीमती अर्चना चिटनिस ने जिले के किसानों को बधाई देते हुए कहा कि बुरहानपुर का केला यहां की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत और क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों का प्रतीक है। जीआई टैग मिलने से इसकी विशिष्टता को आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य, व्यापक बाजार और निर्यात के नए अवसर उपलब्ध होंगे। श्रीमती चिटनिस ने बताया केले को जीआई टैग दिलाने की पहल वर्ष 2013-14 में उनके कार्यकाल के दौरान प्रारंभ की गई थी। उस समय जिले के केले की विशिष्टता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने तथा किसानों को इसका वास्तविक लाभ दिलाने के उद्देश्य से इस विषय को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया गया। इसके बाद लगातार विभिन्न विभागों, कृषि एवं उद्यानिकी विशेषज्ञों तथा संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि लगभग एक दशक से अधिक समय तक चले निरंतर प्रयास, तकनीकी दस्तावेजीकरण, शोध एवं विभागीय समन्वय के परिणामस्वरूप आज बुरहानपुर के केले को यह प्रतिष्ठित पहचान प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि केवल एक उत्पाद को मिला सम्मान नहीं है, बल्कि जिले के हजारों किसानों के परिश्रम, समर्पण और कृषि उत्कृष्टता का राष्ट्रीय स्तर पर हुआ सम्मान है।

श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि मध्यप्रदेश में विशिष्ट कृषि एवं पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की दिशा में लगातार कार्य किया गया है। बालाघाट जिले के प्रसिद्ध चिन्नौर धान को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिससे उसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। इसके साथ ही महेश्वर की विश्वविख्यात महेश्वरी साड़ी तथा हरदा क्षेत्र के बांस उत्पाद भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके हैं। अब बुरहानपुर का केला भी प्रदेश के गौरवशाली जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की सूची में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का ‘‘वोकल फोर लोकल‘‘ तथा ‘‘लोकल टू ग्लोबल‘‘ विजन है तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बुरहानपुर के केले को मिला जीआई टैग इसी सोच और किसान हितैषी प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि जीआई टैग मिलने के बाद बुरहानपुर का केला दुनिया के बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाएगा। इससे जिले के किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा, निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी तथा बुरहानपुर का नाम गुणवत्तापूर्ण केले के उत्पादन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होगा। साथ ही कृषि आधारित उद्योगों और केला प्रसंस्करण इकाइयों को भी नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिले में हजारों किसान केले की खेती से जुड़े हुए हैं और बड़ी मात्रा में उत्पादन कर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। जीआई टैग मिलने से किसानों को बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा तथा उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक सशक्त होगी।

श्रीमती अर्चना चिटनिस ने जिले के किसानों, उद्यानिकी विभाग, प्रशासन एवं इस प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयासों, दृढ़ संकल्प और बुरहानपुर की मिट्टी से जुड़े किसानों की मेहनत का गौरवपूर्ण परिणाम है। बुरहानपुर के केले को मिला जीआई टैग आने वाले वर्षों में जिले की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा और किसानों की समृद्धि का नया अध्याय लिखेगा।

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