देश के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में रहने वाले बैंक ग्राहकों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। आने वाले दिनों में कई एटीएम हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं, जिससे लोगों को नकदी निकालने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने इस गंभीर मुद्दे को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने भी उठाया है।
छोटे शहरों के ATM क्यों हो रहे हैं खाली?
एटीएम ऑपरेटरों का कहना है कि देश के बड़े महानगरों में जरूरत से ज्यादा कैश भेजा जा रहा है, जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के एटीएम तक पर्याप्त नकदी नहीं पहुंच पा रही है। इसके कारण कई मशीनें घंटों ही नहीं बल्कि कई दिनों तक बंद पड़ी रहती हैं। ग्राहकों को पैसे निकालने के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम तक भटकना पड़ रहा है।
SBI की कैश सप्लाई व्यवस्था पर उठे सवाल
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का आरोप है कि देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI अपने अधिकतर कैश मैनेजमेंट संसाधन मेट्रो शहरों पर खर्च कर रहा है। इसका असर छोटे शहरों की एटीएम सेवाओं पर पड़ रहा है। एटीएम संचालकों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मशीनें बंद करनी पड़ सकती हैं।
ATM ऑपरेटरों को हो रहा करोड़ों का नुकसान
कैश की कमी के कारण एटीएम बार-बार ऑफलाइन हो रहे हैं। इससे ऑपरेटरों को ट्रांजैक्शन और इंटरचेंज फीस का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इंडस्ट्री का दावा है कि अब तक 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि यदि 20 जून 2026 तक स्थिति नहीं सुधरी तो कई एटीएम स्थायी रूप से बंद किए जा सकते हैं।
बढ़ती लागत ने बढ़ाई परेशानी
एटीएम चलाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी, डीजल और पेट्रोल की ऊंची कीमतें तथा रखरखाव खर्च ने ऑपरेटरों की कमर तोड़ दी है। दूसरी तरफ आमदनी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जिससे कारोबार घाटे में जा रहा है।
डिजिटल पेमेंट के दौर में घट रहा ATM का इस्तेमाल
देश में UPI और डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि एटीएम से नकदी निकालने वालों की संख्या लगातार घट रही है। पहले जहां करोड़ों लोग हर महीने एटीएम का उपयोग करते थे, वहीं अब डिजिटल भुगतान के कारण इसकी जरूरत कम होती जा रही है। नतीजतन देशभर में एटीएम की संख्या धीरे-धीरे घट रही है और सबसे ज्यादा असर गांवों तथा छोटे कस्बों पर देखने को मिल रहा है।
यदि कैश सप्लाई की समस्या और बढ़ती लागत का समाधान नहीं निकला तो छोटे शहरों और गांवों में नकदी संकट गहरा सकता है। इससे आम लोगों को रोजमर्रा के लेनदेन में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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