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रात आठ बजे कराहों से टूटी खामोशी, आग में जलता रहा दिव्यांग युवक
प्रशासन बेखबर, व्यवस्था मौन — पुलिस जांच में क्या सच आएगा सामने?
खबर वाणी न्यूज़ रफीक
सारनी। क्षेत्र में मानवता को झकझोर देने वाली घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। संघर्षों से भरे जीवन जी रहे दिव्यांग युवक सुनील कुमार लोखंडे की मौत ने प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक संवेदनहीनता की पोल खोल दी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात लगभग आठ नौ बजे के बीच राहगीरों ने कराहने की आवाज सुनी, लेकिन जब तक लोग घटनास्थल तक पहुंचे, तब तक वह आग में बुरी तरह जल चुका था।
बताया जा रहा है कि सुनील अपनी बैटरी चालित विकलांग ट्राई-साइकिल पर जय स्तंभ के पास, बिल्लू टायर की दुकान के पीछे मुख्य मार्ग की पुलिया के समीप अचानक ट्राई-साइकिल में शॉर्ट सर्किट हो गया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। दिव्यांग अवस्था के कारण सुनील न तो साइकिल से उतर सका, न मदद के लिए भाग सका और न ही किसी को पुकार पाया। वह बेबस होकर आग में जलता रहा। लोगों ने जब जाकर देखा तो ट्र साइकिल में बैठे-बैठे वह पूरी तरह जल चुका था सिर्फ खोपड़ी और शरीर का ढांचा ही दिख रहा था बाकी बाकी पूरा शरीर ही जल चुका था सबसे गंभीर सवाल यह है कि घटनास्थल व्यस्त मार्ग पर होने के बावजूद समय रहते मदद क्यों नहीं पहुंची? क्या बैटरी चालित विकलांग वाहनों की कोई नियमित तकनीकी जांच होती है? क्या नगर पालिका या प्रशासन के पास दिव्यांगजनों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था है? हादसे के वक्त न तो कोई फायर सेफ्टी इंतजाम नजर आया और न ही आपातकालीन सहायता प्रणाली सक्रिय दिखी।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू करने की बात कही है, लेकिन सवाल यह है कि जांच में क्या निकलेगा?
क्या यह हादसा सिर्फ
“शॉर्ट सर्किट” बताकर फाइलों में दफना दिया जाएगा, या लापरवाही के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की असफलता का जिंदा सबूत है। क्षेत्र में आक्रोश और शोक का माहौल है। लोग पूछ रहे हैं—अगर एक असहाय दिव्यांग व्यक्ति सरेराह जलता रहा और व्यवस्था सोती रही, तो अगला कौन होगा?





