खबरवाणी
शराब ठेकेदारों की रंजिश के बीच सुलगता जन-असंतोष क्या जन-आंदोलन की कगार पर खड़ा जिला…..
प्रशासन को तत्काल उठाने होंगे कठोर कदम निष्पक्ष जांच या लाइसेंस रद्द करने की देनी होगी चेतावनी……
खबरवाणी सुशील कुशवाह अशोकनगर। जिला अशोकनगर इन दिनों किसी बड़े प्रशासनिक या विकास कार्य की वजह से नहीं, बल्कि शराब व्यवसाय में जारी बेकाबू ‘वर्चस्व की जंग’ के कारण सुर्खियों में है। शहर में संचालित दो अलग-अलग शराब ठेकेदारों के बीच छिड़ी इस प्रतिस्पर्धी जंग ने न केवल आबकारी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है, बल्कि पूरे शहर के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। ग्राहकों को लुभाने से शुरू हुई यह प्रतिस्पर्धा अब एक-दूसरे के खिलाफ शिकायती पत्रों, गंभीर आरोपों और जनता का ध्यान खींचने के नए-नए ‘पैंतरों’ तक पहुंच चुकी है।
जिले में दो अलग-अलग गुटों या ठेकेदारों के पास शराब दुकानों की कमान होने से शुरुआत में लगा था कि व्यावसायिक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट साबित हुई है एक तरफ जहां ठेकेदार आबकारी नियमों का हवाला देकर एक-दूसरे पर तय सीमा से अधिक समय तक दुकानें खोलने, ओवररेटिंग करने और अवैध अहाते चलाने के आरोप लगा रहे हैं वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों की चौखट पर रोज एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा सौंपा जा रहा है। प्रतिस्पर्धा के नाम पर शुरुआती दिनों में दामों में कटौती और लुभावने ऑफर के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश की गई। जब इससे भी बात नहीं बनी, तो अब बात सार्वजनिक आरोपों और जनता की सहानुभूति बटोरने के ‘सस्ते हथकंडों’ पर आ टिकी है। दोनों पक्षों की इस खींचतान में आम नागरिक और आसपास के रहवासी सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं। शराब दुकानों के बाहर लगने वाली अराजक भीड़, देर रात तक होने वाला हुड़दंग और आए दिन होने वाले विवादों ने आसपास के मोहल्लों का माहौल बदतर कर दिया है।
लोगों का कहना है कि दो व्यापारियों की आपसी लड़ाई ने पूरे शहर की शांति व्यवस्था को बंधक बना लिया है। जिला प्रशासन और आबकारी विभाग ने समय रहते इस गुटबाज़ी और खुलेआम नियम-उल्लघंन पर नकेल नहीं कसी, तो यह व्यावसायिक रंजिश जल्द ही एक बड़े जन-आंदोलन में तब्दील हो सकती है। जिला प्रशासन के सामने यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। प्रशासन को दो स्तरों पर तुरंत सख्त और निर्णायक कदम उठाने होंगे दोनों ठेकेदारों की दुकानों, स्टॉक और बिक्री के समय की निष्पक्ष जांच की जाए। जो भी पक्ष नियमों का उल्लंघन करता पाया जाए, उस पर भारी जुर्माना लगाया जाए या लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई हो। शराब व्यवसायी अपने व्यावसायिक हित के लिए जनता और शहर के माहौल का इस्तेमाल ‘ढाल’ की तरह न कर सकें, इसे सुनिश्चित करना कलेक्टर व पुलिस प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि जिला प्रशासन ने सोच-समझकर, बिना किसी दबाव के इस विवाद पर जल्द से जल्द अंतिम और कठोर निर्णय नहीं लिया, तो ठेकेदारों के ये पैंतरे शहर को एक बड़े जनांदोलन की आग में झोंक सकते हैं जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।





