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कर्तव्यनिष्ठा को सलाम: जब अस्पताल में ‘सेवा’ और ‘सम्मान’ का हुआ अद्भुत संगम।
आमला, 18 जुलाई 2026: अक्सर अस्पतालों की दीवारों के बीच केवल दर्द और बेचैनी की गूंज सुनाई देती है, लेकिन आज आमला का सिविल अस्पताल एक अलग ही ऊर्जा से सराबोर था। यहाँ का नज़ारा भावुक कर देने वाला था, जहाँ चिकित्सा जगत के दो रत्न—डॉ. मुकेश वागद्रे और बीएमओ डॉ. राकेश बछले का जन्मदिन पूरी गरिमा और सादगी के साथ मनाया गया।
सेवा धर्म से बढ़कर कोई धर्म नहीं।
यह केवल एक जन्मदिन का जश्न नहीं था, बल्कि यह उस अटूट निष्ठा का सम्मान था, जिसके साथ ये चिकित्सक दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं। कार्यक्रम की सबसे मार्मिक बात डॉ. मुकेश वागद्रे के वे शब्द थे, जिन्होंने वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए जन्मदिन मनाने का सही तरीका यही है कि मैं अपने कर्तव्य पथ पर रहूं। मेरी ड्यूटी ही मेरा असली उत्सव है।
एक नई उम्मीद, एक नया संकल्प।
इस अवसर पर बीएमओ डॉ. राकेश बछले ने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के प्रति अपनी संवेदनशीलता ज़ाहिर की। उन्होंने संकल्प लिया कि अस्पताल में आने वाले हर एक मरीज का इलाज पूरी ईमानदारी और सेवाभाव के साथ किया जाएगा, ताकि संसाधनों की कमी किसी के स्वास्थ्य पर भारी न पड़े।
जब पूरा अस्पताल परिवार एक हुआ।
इस सादगी भरे आयोजन में अस्पताल का स्टाफ।
स्थानीय व्यापारी मंच और गणमान्य नागरिक एक साथ नज़र आए। डॉक्टर्स के चेहरे पर उस संतुष्टि का भाव था जो निस्वार्थ सेवा से मिलती है।
यह आयोजन समाज को यह संदेश देता है कि जब सेवा की भावना सर्वोपरि हो, तो अस्पताल भी एक मंदिर का रूप ले लेता है। ऐसे कर्मठ चिकित्सकों पर न केवल आमला, बल्कि पूरा क्षेत्र गर्व करता है।
हम डॉ. मुकेश वागद्रे और डॉ. राकेश बछले के उज्ज्वल भविष्य और उनके अटूट सेवा भाव को नमन करते हैं!




