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बीजादेही से ढोढरामऊ तक गांव-गांव शराब का नेटवर्क? अवैध बिक्री के आरोपों से घिरा आबकारी विभाग

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खबरवाणी

बीजादेही से ढोढरामऊ तक गांव-गांव शराब का नेटवर्क? अवैध बिक्री के आरोपों से घिरा आबकारी विभाग

किराना दुकानों और घरों तक पहुंच रही शराब; आदिवासी अंचल में बढ़ती लत और सामाजिक बुराइयों को लेकर ग्रामीणों में चिंता

भौंरा । शाहपुर विकासखंड के आदिवासी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की कथित अवैध बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकृत शराब दुकानों से निकलकर शराब अब गांव-गांव तक पहुंच रही है। बीजादेही, सोनादेह, ढोढरामऊ, डाबरी, बानाबेहड़ा, घपाड़ा, कछार, हांडीपानी, गुरगुंदा, निशाना, पाठई, बरजोरपुर सहित अनेक गांवों में किराना दुकानों और निजी घरों से शराब बेचे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में शराब इतनी आसानी से उपलब्ध हो गई है कि लोगों को अब अधिकृत शराब दुकानों तक जाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती। आरोप है कि ठेकेदारों के माध्यम से गांवों तक शराब पहुंचाई जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की खपत लगातार बढ़ रही है।

आदिवासी अंचल को बनाया जा रहा आसान बाजार?

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आदिवासी बहुल क्षेत्र होने का फायदा उठाकर शराब कारोबार को गांवों तक फैलाया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर और मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों को गांव में ही शराब उपलब्ध होने से नशे की लत बढ़ती जा रही है। दिनभर की कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च हो रहा है, जिसका असर सीधे परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले शराब खरीदने के लिए लोगों को बाजार या अधिकृत दुकान तक जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही उपलब्धता बढ़ने से खपत भी बढ़ गई है। इसका दुष्प्रभाव युवाओं और मजदूर वर्ग पर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है।

गांवों में बढ़ रहे विवाद और सामाजिक समस्याएं

स्थानीय लोगों के अनुसार शराब की आसान उपलब्धता के कारण कई गांवों में आपसी विवाद, मारपीट, घरेलू कलह और सामाजिक तनाव की घटनाएं बढ़ रही हैं। महिलाओं का कहना है कि मजदूरी और खेती से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च हो जाता है, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शराब की बढ़ती खपत का असर बच्चों की पढ़ाई, परिवार के स्वास्थ्य और सामाजिक वातावरण पर भी पड़ रहा है। कई परिवारों में आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है।

कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति?

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है। लोगों का कहना है कि विभाग समय-समय पर महुआ या कच्ची शराब की छोटी-मोटी जब्ती दिखाकर कार्रवाई का दावा करता है, लेकिन गांवों में कथित रूप से चल रहे शराब आपूर्ति नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई नहीं होती।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि गांवों में खुलेआम शराब बेचे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो आबकारी विभाग की नियमित जांच और निगरानी व्यवस्था आखिर क्या कर रही है? लोगों का कहना है कि यदि विभाग वास्तव में गंभीरता से जांच करे तो गांवों में शराब पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि शराब बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों से होनी चाहिए, लेकिन यदि गांवों में किराना दुकानों और घरों तक शराब पहुंच रही है तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से शराब कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।

स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर, पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग से मांग की है कि शाहपुर क्षेत्र के गांवों में विशेष संयुक्त अभियान चलाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए, अवैध बिक्री में शामिल लोगों की पहचान की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

बड़ा सवाल

जब बीजादेही से लेकर दर्जनों गांवों में शराब बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, तब आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? यदि शराब केवल अधिकृत दुकानों से ही बिक रही है तो गांव-गांव तक इसकी उपलब्धता कैसे हो रही है? और यदि शिकायतें सही हैं तो अब तक बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही सवाल आज पूरे शाहपुर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

जिला आबकारी अधिकारी अंशुमान चढ़ार ने बताया कि विभाग में स्टाफ की कमी होने के कारण सभी क्षेत्रों में नियमित रूप से निरीक्षण कर पाना संभव नहीं हो पाता। हालांकि विभाग को प्राप्त होने वाली शिकायतों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि शाहपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतों की जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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