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छुट्टियों में मोबाइल से दूरी, रचनात्मकता से हुई दोस्ती; 10 दिन के समर कैंप ने बच्चों को सिखाए जीवन के गुर
भौंरा। गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं शाहपुर विकासखंड के भौंरा में आयोजित 10 दिवसीय समर कैंप ने बच्चों को रचनात्मकता, सीखने और आत्मविकास की नई राह दिखाई। सक्षम जीवन कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत कम्युनिटी यूथ लीडर (सीवाईएल) पूनम पासी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कैंप में 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 25 बच्चों ने भाग लेकर जीवन कौशल, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार की सीख हासिल की।
कैंप के दौरान बच्चों को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उनमें नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक सोच विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। विभिन्न खेल आधारित गतिविधियों, समूह चर्चाओं और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से बच्चों को सीखने का अवसर मिला।
शिविर की विशेषता यह रही कि बच्चों को पर्यावरण और प्रकृति से जोड़ने के लिए बीजों के महत्व, अंकुरण प्रक्रिया और वृक्षों की उपयोगिता की जानकारी दी गई। साथ ही पुराने अखबारों, पत्रिकाओं और अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी सामग्री तैयार कर उन्हें ‘वेस्ट टू बेस्ट’ की अवधारणा से परिचित कराया गया। चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया।
कम्युनिटी यूथ लीडर पूनम पासी ने बताया कि समर कैंप का उद्देश्य बच्चों को छुट्टियों का सार्थक उपयोग सिखाने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास में सहयोग करना था। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चों के लिए केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल भी उतने ही आवश्यक हैं। ब्लॉक मैनेजर मीना सातनकर ने कहा कि ऐसे शिविर बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनकी अभिव्यक्ति क्षमता, रचनात्मक सोच और सामाजिक व्यवहार को मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि जीवन कौशल आधारित गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव तैयार करती हैं।





