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Teachers In Politics – गुरुजनों ने भी किया जिले का प्रतिनिधित्व

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उइके सरनेम को मिला बार-बार अवसर

Teachers In Politicsबैतूल बैतूल जिले की राजनैतिक पृष्ठभूमि को सूक्ष्मता से देखा जाए तो बैतूल ने विभिन्न मौकों पर अधिवक्ताओं, चिकित्सकों और शिक्षकों को भी विभिन्न राजनैतिक दलों ने लोकसभा और विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया है। अधिवक्ताओं की बात करें तो इनकी सूची लंबी है जिसमें जनसंघ (अब भाजपा) और कांग्रेस दोनों ने ही चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं चिकित्सकों की स्थिति भी ऐसी ही है। इन्हें भी कांग्रेस-भाजपा दोनों ने ही समय-समय पर प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया।

लेकिन गुरुजनों को जिन्हें यह माना जाता है कि उनका कार्य क्षेत्र सीमित है उन्हें भी चुनाव लडऩे उम्मीदवार बनाया और वह सफल भी हुए। लेकिन सिर्फ भाजपा ऐसी पार्टी है जिसमें शिक्षकों को प्रतिनिधित्व दिया।

रामजीलाल गुरुजी बने मंत्री | Teachers In Politics

1980 में भाजपा के गठन के बाद हुए विधानसभा चुनाव में पहली बार शिक्षक को चुनाव लडऩे का मौका मिला। घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट से शिक्षक रहे रामजीलाल उइके भाजपा की टिकट पर 1980 में पहली बार विधायक बने। 1985 के विधानसभा चुनाव में रामजीलाल उइके चुनाव हार गए। लेकिन फिर 1990 में रामजीलाल उइके भाजपा की टिकट पर विधायक निर्वाचित हो गए और उन्हें सुंदरलाल पटवा की सरकार में संसदीय सचिव मिलने का मौका मिला। लेकिन 1993 और 1998 के विधानसभा चुनाव में रामजीलाल कांग्रेस उम्मीदवार से चुनाव हार गए। और इसके बाद श्री उइके चुनावी राजनीति से दूर हो गए।

सज्जन सिंह भी बने विधायक

शिक्षक की नौकरी कर रहे सज्जनसिंह उइके को अचानक भारतीय जनता पार्टी ने इस्तीफा दिलवाकर 2003 के विधानसभा चुनाव में घोड़ाडोंगरी सीट से चुनाव लड़वाया और वे कांग्रेस के पूर्व मंत्री को चुनाव हराकर विधायक बने। 2008 में उन्हें पार्टी ने चुनाव लडऩे का अवसर नहीं दिया। लेकिन 2013 में फिर एक बार सज्जन सिंह को भाजपा ने टिकट दी और वे फिर जीते लेकिन बीमारी के चलते उनका 2016 में निधन हो गया था।

दुर्गादास बने सांसद | Teachers In Politics

शिक्षक दुर्गादास उइके कई वर्षों से लोकसभा चुनाव लडऩे के लिए प्रयासरत थे लेकिन भाजपा ने उनको 2019 के लोकसभा चुनाव मेंं बैतूल-हरदा-हरसूद संसदीय सीट से चुनाव लडऩे की बड़ी जिम्मेदारी दी और उन्होंने बैतूल जिले में इतिहास बनाते हुए सबसे बड़ी जीत दर्ज की। दुर्गादास उइके को लोकसभा चुनाव में 8 लाख 11 हजार 248 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के रामू टेकाम को 4 लाख 51 हजार 7 वोट मिले थे। इस तरह से 3 लाख 60 हजार 241 वोटों से जीत दर्ज कर कीर्तिमान बना दिया। श्री उइके वर्तमान में लोकसभा की कई विभागों की संसदीय सलाहकार समिति के सदस्य है।

शिक्षिका गंगाबाई को मिला मंत्री दर्जा

शिक्षक और विधायक रहे सज्जनसिंह उइके की पत्नी शिक्षिका गंगाबाई उइके भी भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। और 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट से भाजपा की ओर से टिकट की गंभीर दावेदार है। शिवराज सिंह सरकार ने पिछले टर्म में राज्य महिला आयोग की सदस्य बनाया था और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था।

हर बार उइके सरनेम को ही मिला मौका | Teachers In Politics

भाजपा ने जितने भी अवसर पर शिक्षकों को राजनीति के मैदान में उतारा संयोग से वे सभी उइके सरनेम वाले हैं। सांसद डीडी उइके, विधायक रामजीलाल उइके, विधायक सज्जनसिंह उइके, राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त गंगाबाई उइके और घोड़ाडोंगरी से 2008 में भाजपा की ओर से विधानसभा चुनाव जीती गीताबाई भी उइके ही हैं।

कांग्रेस ने भी उइके सरनेम से जुड़े नेताओं को मैदान में उतारा है इनमें घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट से ही 1993 में अपने जीवन का पहला चुनाव लड़े प्रताप सिंह उइके शामिल है। जो 1993 और 1998 में चुनाव जीते हैं। 1998 के दौरान प्रताप सिंह उइके को कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार ने राज्यमंत्री बनाया था।

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