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JH College – मामा के राज में जेएच के भांजे-भांजी परेशान

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एससी, एसटी के हजारों बच्चों को नहीं मिल रही स्टेशनरी

JH Collegeबैतूल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने भांजे-भांजियों की शिक्षा को लेकर काफी गंभीर है और कई योजनाओं के माध्यम से उन्हें बेहतर शिक्षा दिलाना चाहते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। योजनाओं का लाभ बच्चों को नहीं मिल रहा है।

ऐसा ही एक मामला जेएच कालेज(JH College) का सामने आया है जिसमें पिछले दो सालों से उच्च शिक्षा ले रहे एससी, एसटी वर्ग के विद्यार्थियों को स्टेशनरी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इससे साफ है कि कालेज के प्राचार्य इस योजना का लाभ दिलाने में रूचि नहीं रखते हैं। और बजट नहीं होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

यह है योजना

उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश शासन ने शासकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्नातक स्नातकोत्तर कक्षाओं में संचालित पाठ्यक्रम में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नि:शुल्क पुस्तकें एवं स्टेशनरी प्रदान करने की योजना संचालित की है।

इस योजना के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को 1500 रुपए की पुस्तकें और 500 रुपए की स्टेशनरी दी जाती है। योजना को संचालित करने के लिए प्राचार्य को अधिकारी बनाया गया है। प्राचार्य क्रय करके विद्यार्थियों को वितरित करेंगे। योजना हर साल वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक रहती है।

दो साल से नहीं मिली स्टेशनरी

जिले का सबसे बड़ा सरकारी कालेज जेएच कालेज के एससी और एसटी वर्ग के विद्यार्थियों को स्टेशनरी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। पिछले साल बजट नहीं आने के कारण जहां इस योजना का लाभ नहीं मिल वहीं इस साल भी इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जानकार बताते हैं कि प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्राचार्य रूचि नहीं ले रहे हंै।

जेएच कालेज(JH College) में पूरे जिले से लगभग 11 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इसमें 5338 विद्यार्थी एससी और एसटी वर्ग के हैं। स्टेशनरी नहीं मिलने से गरीब विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में काफी दिक्कत होती है। सरकार की योजना का लाभ नहीं मिलेगा तो विद्यार्थियों का भविष्य कैसे बनेगा।

वंचित रह गए हजारों विद्यार्थी

स्टेशनरी योजना को लेकर पिछले साल की बात करें तो जिन विद्यार्थियों के आखरी साल थे उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिला और वे पढ़ाई पूरी करके कालेज छोडक़र चले गए। ऐसी भी जानकारी मिली है कि पिछले साल आखरी समय में बजट आया जिसका उपयोग नहीं किया गया है। सीधे तौर पर कालेज प्रबंधन विद्यार्थियों के भविष्य से खेल रहा है।

ऐसी ही स्थिति रही तो इस साल भी बच्चों को योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। जब शिक्षा सत्र शुरू होता है तभी उन्हें पुस्तकें और स्टेशनरी मिल जाए तो वे उसका उपयोग कर सकते हैं। अगर आखरी में बजट आता है तो योजना का कोई औचित्य नहीं है।

इनका कहना…

पिछले वर्ष प्रस्ताव भेजने के बाद भी बजट नहीं मिला था। इस साल बजट नहीं है।

राकेश तिवारी, प्राचार्य, जेएच कालेज, बैतूल

स्टेशनरी का लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा है। यह संज्ञान में आया है इसको लेकर प्राचार्य से चर्चा करेंगे।

घनश्याम मदान, अध्यक्ष जनभागीदारी समिति, जेएच, कालेज, बैतूल
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