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Political News – बैतूल विधानसभा में होगा प्रतिष्ठा बचाने का संघर्ष

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मिथक को लेकर चिंतित होंगे दोनों प्रत्याशी

Political Newsबैतूल जैसा की राजनैतिक समीक्षकों का आंकलन है कि 2023 के इस विधानसभा चुनाव में जिले की सबसे प्रतिष्ठापूर्ण एवं चर्चित हॉट सीट बन चुकी बैतूल विधानसभा में फिर एक बार नगर के दो प्रमुख परिवारों की तीसरी पीढ़ी के दोनों प्रतिनिधि अपनी-अपनी और अपने पुरखों की प्रतिष्ठा कायम रखने के लिए चुनाव जीतने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। चाहे इसके लिए साम, दाम, दण्ड, भेद की नीति क्यों ना अपनाना पड़े।

क्योंकि बैतूल के डागा और खण्डेलवाल परिवार दोनों के लिए 2023 का चुनाव अपनी राजनैतिक जमीन बचाने के लिए प्रतिष्ठापूर्ण होने वाला है जिसमें जो जीता वो लंबे समय तक बैतूल जिले की राजनीति में जमा रहेगा ऐसा राजनैतिक समीक्षकों का मानना है।

तीसरी पीढ़ी के हेमंत है मैदान में

1962 में बैतूल विधानसभा सीट से जिले के प्रसिद्ध अधिवक्ता स्व. आरडी खण्डेलवाल ने चुनाव लड़ा था। लेकिन वे सफल नहीं हुए। उसके बाद उनके कनिष्ठ पुत्र स्व. विजय कुमार खण्डेलवाल ने अपने जीवन का पहला बड़ा चुनाव 1996 में बैतूल-हरदा संसदीय सीट से लड़ा था। और सफल होने के बाद निरंतर 1998, 1999 एवं 2004 में चुनाव जीतकर जिले के राजनैतिक इतिहास के सभी रिकार्ड तोड़ दिए और 2007 में अपने देहावसन तक अपराजित रहे।

इस दौर में उनके कनिष्ठ पुत्र हेमंत खण्डेलवाल पिता की राजनैतिक विरासत को संभालने और संजोने में लगे रहे। 2008 के लोकसभा उपचुनाव में अपने जीवन का पहला चुनाव लड़े हेमंत खण्डेलवाल विजयी हुए। और 2009 में यह सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हो गए इसलिए 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने श्री खण्डेलवाल को बैतूल विधानसभा सीट से उतारा और वह चुनाव जीत गए लेकिन 2018 के चुनाव में उन्हें इसी सीट से पराजय का सामना करना पड़ा। 2023 के इस चुनाव में पुन: एक बार फिर हेमंत खण्डेलवाल का भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩा तय है।

तीसरी पीढ़ी का ही प्रतिनिधित्व कर रहे निलय | Political News

1967 के विधानसभा चुनाव में पहली बार डागा परिवार से कांग्रेस की टिकट पर तत्कालिन नपाध्यक्ष स्व. हरकचंद डागा ने चुनाव लड़ा। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद लंबे समय तक कांगे्रस में डागा परिवार संगठन की राजनीति करता रहा। लेकिन अचानक 1998 के चुनाव में कांग्रेस के सीटिंग एमएलए अशोक साबले की टिकट काटकर स्व. हरकचंद डागा के कनिष्ठ पुत्र स्व. विनोद डागा को कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतार दिया और वे चुनाव जीत गए। लेकिन कांग्रेस की टिकट पर ही 2003 और 2008 के विधानसभा चुनाव में स्व. विनोद डागा सफल नहीं हुए और एक बार फिर डागा परिवार चुनावी राजनीति से दूर हो गया।

लेकिन 10 वर्ष बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में स्व. विनोद डागा के कनिष्ठ पुत्र निलय डागा पर कांग्रेस पार्टी ने विश्वास जताया और वो चुनाव जीत गए। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी यह माना जा रहा है कि निलय डागा का चुनाव लडऩा निश्चित है।

कनिष्ठ पुत्र ही आए राजनीति में

डागा और खण्डेलवाल परिवार के जितने भी सदस्य चुनावी राजनीति में मैदान में आए वह सभी अपने पिता के कनिष्ठ पुत्र हैं। स्व. आरडी खण्डेलवाल के कनिष्ठ पुत्र स्व. विजय खण्डेलवाल और उनके कनिष्ठ पुत्र हेमंत खण्डेलवाल राजनीति में सक्रिय हुए। वहीं डागा परिवार के स्व. हरकचंद डागा के कनिष्ठ पुत्र स्व. विनोद डागा और उनके कनिष्ठ पुत्र निलय डागा बैतूल से विधायक है।

मिथक टूटेगा या रहेगा बरकरार | Political News

अभी तक चली जा रही संभावनाओं के अनुसार बैतूल विधानसभा सीट से भाजपा से 2013 में चुनाव जीते हेमंत खण्डेलवाल और कांग्रेस से 2018 में चुनाव जीते निलय डागा चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। लगभग 56 वर्षों से बैतूल विधानसभा सीट पर यह मिथक बना हुआ है कि एक उम्मीदवार लगातार दुबारा नहीं जीतता है और यही डर कांग्रेस उम्मीदवार के सामने है कि क्या यह मिथक टूटेगा और वह निरंतर दूसरा चुनाव जीतेंगे।

वहीं भाजपा उम्मीदवार को भी यह डर अवश्य होगा कि मिथक कायम रहने से उनकी जीत तय होगी। वैसे चुनाव जीतने और हारने के लिए कई राजनैतिक परिस्थितियां बनती है और बिगड़ती हैं।

शक्ति प्रदर्शन की हुई शुरूआत

वैसे तो अभी कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही बैतूल विधानसभा को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन राजनैतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि निलय डागा और हेमंत खंडेलवाल का चुनाव लड़ना तय है और इसी के मद्देनजर कल जिस विशाल स्तर पर हेमंत खंडेलवाल के जन्मदिन का आयोजन हुआ उससे दो चीजे स्पष्ट हुई पहला श्री खंडेलवाल का चुनाव लड़ना 100 प्रतिशत तय है और दूसरा अब निलय डागा समर्थक इससे बड़े आयोजन की तैयारी में लग जाएंगे। वैसे कांग्रेस का एक धड़ा निलय डागा की टिकिट कटवाने में प्रयासरत है, लेकिन सफलता मिलना मुश्किल है।

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