
Political News – बैतूल – चुनाव के तीन महीने पहले ही प्रदेश की 39 सीट घोषित कर सबको चौंका दिया था। इसी कड़ी में अब पिछले चुनाव में भाजपा टिकट पर हारे 70 और उम्मीदवारों की सूची जारी होने की संभावना है। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन 70 उम्मीदवारों को भाजपा ने चुनाव लडऩे के संकेत दे दिए हैं। इनमें बैतूल जिले की भी एक सीट शामिल है।
हेमंत खण्डेलवाल का चुनाव लडऩा तय

2013 में भाजपा की टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और जीते हेमंत खण्डेलवाल को 2018 में भी चुनाव मैदान में उतारा था लेकिन उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी। भाजपा द्वारा तय किए गए कथित क्राइटएरिया के अनुसार यह माना जा रहा था कि इस बार बैतूल विधानसभा सीट पर नया उम्मीदवार दिखाई देगा लेकिन यह तय हो गया है कि तीसरी बार लगातार हेमंत खण्डेलवाल ही भाजपा की ओर से बैतूल विधानसभा सीट से उम्मीदवार होंगे। पिछले कई दिनों से उन्हें युद्ध स्तर पर चुनाव लडऩे की तैयारी शुरू कर दी है और इसलिए संकेत मिल रहे हैं कि श्री खंडेलवाल का चुनाव लडऩा तय है। अब 3 सितम्बर को श्री खण्डेलवाल के जन्मदिवस पर जिस तरह से बड़ा आयोजन किया जा रहा है उससे यह स्पष्ट हो गया है कि श्री खण्डेलवाल मैदान में आ गए हैं।
कांग्रेस से निलय डागा होंगे उम्मीदवार

कांग्रेस सूत्रों से भी मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस सीटिंग एमएलए निलय डागा फिर एक बार बैतूल विधानसभा सीट से चुनाव लडऩे का अवसर प्रदान कर रही है। वैसे देखा जाए तो निलय डागा 2018 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से ही इलेक्शन मोड में है। अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर के लिए चंदा और अपने सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय डागा फाउंडेशन के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों से सतत् संपर्क बनाए हुए हैं। वैसे यह भी जानकारी बाहर आ रही थी कि जिले में कांग्रेस का दूसरा गुट निलय डागा की उम्मीदवारी पर ब्रेक लगाने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहा है। लेकिन सशक्त विकल्प के अभाव में कांग्रेस हाईकमान भी दूसरे उम्मीदवार पर रिस्क नहीं लेना चाह रही है।
जोडिय़ां रिपीट हो रही लेकिन बदल जाते परिणाम

बैतूल विधानसभा में कांग्रेस और विपक्षी दल के उम्मीदवारों की जोडिय़ां रिपीट होती रही है। 1977 से बैतूल विधानसभा में कई जोडिय़ां चुनाव रिपीट होती रही है। 1977 में निर्दलीय से माधवगोपाल नासेरी और कांग्रेस से मारोतीराव पांसे लड़े थे। इसी तरह से 1980 में भी भाजपा से नासेरी और कांग्रेस से पांसे रहे मैदान में। इसी तरह से 1990 और 1993 में भाजपा से भगवत पटेल और कांग्रेस से डॉ. अशोक साबले ने चुनाव लड़ा। 1998 एवं 2003 में कांग्रेस से विनोद डागा और भाजपा से शिवप्रसाद राठौर आमने-सामने रहे। 2018 में आमने-सामने चुनाव लड़े कांग्रेस के निलय डागा और भाजपा के हेमंत खण्डेलवाल 2023 में रिपीट हो सकते हैं। इन जोडिय़ों में खासियत यह रही है कि हर बार बदल-बदलकर उम्मीदवार चुनाव जीता है।





