
जानलेवा बने पुल पुलियों की नहीं ले रहे सुध
Betul News – बैतूल – गंज में हुई एक चोरी को लेकर बैतूल के सभी दलों के जनप्रतिनिधि एवं नेता हायतौबा करने लगे। लेकिन शहर के कुछ ऐसे पुल-पुलिया हैं जो जानलेवा साबित हो रहे हैं और कई की जान भी ले चुके हैं उनकी तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है।
इन पुल-पुलियाओं को देखकर लगता है कि विकास का दावा करने वाली पार्टियों के दावे खोखले हैं। हाल ही में कुुछ दिन पहले गंज के रेलवे अंडरब्रिज के पास स्थित पुलिया से कार बहने पर दो युवकों की मौत हो गई। ऐसी ही घटनाएं करबला पुल से कई बार घट चुकी है। इन पुल-पुलियाओं पर घटना को रोकने के लिए मजबूत रैलिंग नहीं लगाई गई।
करबला पुल | Betul News
बैतूल से परतवाड़ा और इंदौर जाने वाले मार्ग पर सदर के पास स्थित माचना नदी के करबला पुल पर कई घटनाएं घट चुकी हैं। बारिश के समय माचना नदी उफान पर होती है तो पुल छोटा होने के कारण पानी पुल के ऊपर से बहता है। ऐसे में रैलिंग नहीं होने के कारण कई वाहन पुल के नीचे गिर गए और कई लोगों की जान भी चली गई। एक बाईक सवार इस पुल से बह गया था जिसका लाइव वीडियो सामने आने के बाद घटना राष्ट्रीय स्तर तक सुर्खियों में आई थी।

इस घटना के बाद पुल पर पाइप की रैलिंग तो लगा दी गई लेकिन यह रैलिंग इतनी मजबूत नहीं है कि घटना को रोक सके। बताया जाता है कि यह पुल अंग्रेजों के समय का है। अगर इस पुल की ऊंचाई बढ़ा दी जाए तो बारिश में यातायात प्रभावित नहीं होगा।
अंडरब्रिज की पुलिया
कुछ दिन पहले ही भारी बारिश के चलते गंज रेलवे अंडरब्रिज के पास की पुलिया के ऊपर से पानी बह रहा था। ऐसा बताया जाता है कि इस पुलिया को कार से पार कर रहे दो युवक कार सहित बह गए और उनकी मौत हो गई। शहर के दोनों होनहार युवकों की मौत पर लोगों ने नाराजगी भी जताई। लोगों का कहना था कि जनप्रतिनिधियों को इस पुलिया को लेकर कुछ करना चाहिए क्योंकि इस पुलिया पर बहुत ही यातायात रहता है।

गंज से बडोरा, रामनगर, भैंसदेही, आठनेर, नागपुर जाने के लिए इसी पुलिया का उपयोग करते हैं। बारिश के दिनों में लोगों को पुलिया के ऊपर पानी होने के कारण लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। यहां पर लगाई गई रैलिंग भी टूटी हुई है।
मुले अस्पताल के पास की पुलिया | Betul News
कूपर गैस एजेंसी से विजय भवन जाने वाले मार्ग पर मुले अस्पताल के पास की पुलिया भी बेहद खतरनाक है। इस पुलिया पर भी रैलिंग नहीं होने के कारण यहां भी हादसे होते रहते हैं। इस पुलिया पर भी एक बुजुर्ग कार सहित पुलिया के नीचे गिर गया था। वह तो शुक्र है कि बुजुर्ग को अधिक चोट नहीं लगी लेकिन कार बेहद क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके अलावा एक बालिका भी साइकिल सहित पुलिया के नीचे गिर गई थी जिससे उसे गंभीर चोट आने पर वह दो माह तक निजी अस्पताल में भर्ती रही थी।

इस पुलिया पर भी रैलिंग नहीं लगाई गई है। यदि नगर पालिका और पीडब्ल्यूडी चाहे को एक सप्ताह के भीतर ही सभी पुल और पुलियाओं को सुरक्षित करने के लिए रैलिंग लगाई जा सकती है।
नहीं हुई जिम्मेदारी तय
शहर के इन पुल और पुलियाओं पर आए दिन हो रहे जानलेवा हादसों के बाद भी किसी की भी जिम्मेदारी आज तक तय नहीं हुई है। वैसे तो पुल के ऊपर पानी होने के कारण उसे पार नहीं करना चाहिए। कई बार लोग बहुत जरूरी काम होने के कारण अपनी जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
अब सवाल इस बात का है कि इतने व्यस्ततम मार्गों पर स्थित इन पुल पुलियाओं को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान क्यों नहीं जाता है? एक तरफ विकास की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन शहर के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।






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