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हाईवे की जमीन पर घमासान: नांदा के किसानों ने पूछा—गलती NHAI की या सर्वे करने वाले पटवारी की?
4 गुना मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण, दोबारा सर्वे और रिकॉर्ड दुरुस्त करने की मांग; मांगें नहीं मानी तो महाआंदोलन की चेतावनी
सवाँददाता प्रदीप यादव
बैतूल/भीमपुर। आशापुर राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजा राशि को लेकर भीमपुर तहसील के नांदा गांव में किसानों का आक्रोश सामने आया है। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के एक बड़े दल ने ग्राम पंचायत नांदा में तहसीलदार वसंत कुमार बरखानिया से मुलाकात कर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में सामने आ रही कथित विसंगतियों को दूर करने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर महाआंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
ज्ञापन में किसानों की प्रमुख मांगें
2026 की गाइडलाइन के अनुसार 4 गुना मुआवजा दिया जाए।
भूमि अधिग्रहण का दोबारा सर्वे कराया जाए।
सर्वे में छूटे किसानों के नाम शामिल किए जाएं।
राजस्व नक्शे और वास्तविक सीमांकन के अनुसार रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाए।
भूमि स्वामियों के मकान, कुएं, ट्यूबवेल और पेड़ों का अलग-अलग सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए।
किसान की वास्तविक भूमि का सही चिन्हांकन कर उसी के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाए।
नोटिस और वास्तविक भूमि स्वामित्व में सामने आ रही विसंगतियों को दूर किया जाए।
किसानों का आरोप—दो लेन का मुआवजा, चार लेन की जमीन
भूमि स्वामी कैलाश यादव, द्वारका प्रसाद यादव, राजू सहित अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के नाम पर किसानों के साथ उचित व्यवहार नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि उन्हें दो लेन के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि जमीन चार लेन के लिए ली जा रही है।
किसानों ने कहा कि अधिग्रहण के लिए किए गए सर्वे में कई विसंगतियां हैं। जमीन किसी की है और नोटिस किसी दूसरे व्यक्ति को दिए जाने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन में कुएं, ट्यूबवेल और कीमती पेड़ मौजूद हैं, लेकिन इनका उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है।
पटवारी के सर्वे पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण की मौजूदा स्थिति के लिए पुराने सर्वे और राजस्व रिकॉर्ड की खामियों को भी जिम्मेदार बताया है। किसानों का कहना है कि यदि पटवारी द्वारा समय रहते सही सर्वे और सीमांकन किया गया होता तो आज इतनी बड़ी समस्या उत्पन्न नहीं होती।
ग्रामीणों का आरोप है कि भीमपुर ब्लॉक में सर्वे के दौरान हुई कथित गलतियों का खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि उस समय जमीन का सही रिकॉर्ड, सीमांकन और वास्तविक स्थिति दर्ज कर ली जाती तो भूमि अधिग्रहण के समय किसानों को नोटिस और मुआवजे को लेकर परेशानी नहीं होती।
अब सवाल—गलती किसकी, खामियाजा किसान क्यों भुगते?
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या मौजूदा विसंगतियों के लिए NHAI जिम्मेदार है या राजस्व विभाग द्वारा किया गया सर्वे?
किसानों का कहना है कि यदि NHAI की ओर से अधिग्रहण प्रक्रिया में कोई कमी है तो उसे दूर किया जाए और यदि राजस्व रिकॉर्ड अथवा पटवारी स्तर के सर्वे में गलती हुई है तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
अब देखने वाली बात होगी कि नानंदा में सामने आई भूमि अधिग्रहण की इन कथित विसंगतियों के लिए जिम्मेदार कौन है और किसानों को हो रही परेशानी का समाधान प्रशासन किस तरह करता है।
‘4 गुना मुआवजा नहीं तो जमीन नहीं’
प्रभावित किसान रामसिंह, दीना और दादू सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि वे उचित मुआवजे की मांग को लेकर लगातार आवेदन और निवेदन कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो महाआंदोलन किया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे अंतिम सांस तक उचित मुआवजे के लिए संघर्ष करते रहेंगे। किसानों ने NHAI के अधिकारी की मवजूदगी मे जब किसानों ने NAHI के अधिकारियो से किसानों ने पूछा की आपके द्वारा जो सर्वे किया वो सर्वे कही ओर का और मुआवजा कही और का इसी बात पर NHAI के अदिकारियों के पशीने छुट गये और उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं देपाए जब किसानों के खेतो मे सर्वे हुवा तो किसानों का कहना की इस बात की जानकारी किसीभी किसानों को नहीं NAHI वालो ने अपनी गलती सुधरते हुवे कहा की नांदा हल्का 27 का सर्वे फिर से किया जाये गा
ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है—‘4 गुना मुआवजा नहीं तो जमीन नहीं।’




