खबरवाणी
निर्माण कार्य में अनियमिताएं’……भ्रष्टाचार का ‘फ्लश’ आमला जंक्शन के आधुनिकीकरण में घटिया सामग्री का खेल
आमला। यात्रियों की सुविधाओं से खिलवाड़; चमचमाते स्टेशन के पीछे छुपा बदरंग सच, ₹33 करोड़ के बजट वाले
निर्माण कार्यों में
लोकल ब्रांड के स्विच बोर्ड, नल और टॉयलेट सीट लगाने से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश
आमला। केंद्र सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ चलाई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत आमला जंक्शन का भी चयन किया गया है, ताकि यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें। लेकिन आमला जंक्शन पर चल रहे इन आधुनिकरण और निर्माण कार्यों में भारी भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। शासन द्वारा करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत किए जाने के बावजूद, यहां धड़ल्ले से अत्यंत घटिया और लो-क्वालिटी निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इस धांधली को लेकर स्थानीय नागरिकों और रेल यात्रियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
यात्रियों की सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति
अमृत भारत योजना का मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है। इसके विपरीत, आमला जंक्शन पर हो रहे निर्माण कार्यों में मानकों को ताक पर रख दिया गया है। स्टेशन परिसर और प्रतीक्षालयों में यात्रियों के रोजाना उपयोग के लिए बनाई जा रही बुनियादी सुविधाओं में बड़े पैमाने पर तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं देखी जा रही हैं।
शौचालयों से लेकर बिजली फिटिंग तक सब ‘थर्ड क्लास‘
स्थानीय यात्रियों महेश राणे, विशाल पवार, विकास ठाकरे, गोलू सोलंकी, विजय सिंह सहित अन्य द्वारा नईदुनिया से कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री को लेकर चर्चा में बताया कि स्टेशन पर लगाए जा रहे इलेक्ट्रिकल स्विच बोर्ड, शौचालय में लगे नल, टॉयलेट सीट, फ्लश वाल्व, वेस्टर्न शौचालय और वॉशबेसिन जैसी महत्वपूर्ण सामग्रियां बेहद घटिया दर्जे की हैं। नियमानुसार इन कार्यों में उच्च गुणवत्ता और ब्रांडेड सामानों का उपयोग किया जाना चाहिए था, ताकि वे लंबे समय तक टिक सकें। लेकिन ठेकेदारों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण यहां अत्यंत सस्ती और कम टिकाऊ सामग्री लगाई जा रही है, जो उद्घाटन से पहले ही जवाब देने लगी है। शौचालयों की स्थिति इतनी खराब है कि नई फिटिंग भी पहली नजर में कबाड़ जैसी नजर आ रही है।
करोड़ों के बजट पर फिरा पानी, स्थानीय लोगों में गुस्सा
अमृत भारत योजना के तहत आमला जंक्शन के कायाकल्प के लिए लगभग 33 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। इतनी बड़ी राशि मिलने के बाद भी स्टेशन की यह दुर्दशा देखकर क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार आम जनता के टैक्स के पैसे से सुविधाएं विकसित कर रही है, लेकिन निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण इस राशि का खुला दुरुपयोग हो रहा है। घटिया निर्माण के कारण यह सामग्रियां कुछ ही महीनों में खराब हो जाएंगी, जिससे यात्रियों को फिर से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
नागरिकों ने इस पूरे मामले में रेलवे के उच्च अधिकारियों और सतर्कता विभाग से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि कार्य स्थल पर उपयोग की जा रही सभी सामग्रियों—जैसे स्विच बोर्ड, नल, और टॉयलेट सीट—की गुणवत्ता की लैब टेस्टिंग कराई जाए। साथ ही, भ्रष्ट ठेकेदारों और इसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन की बर्बादी रोकी जा सके और आमला जंक्शन को वास्तव में एक आदर्श स्टेशन बनाया जा सके।
इनका कहना है
मुख्य परियोजना प्रबंधक
रेल्वे विभाग नागपुर
सुधीर कुमार पटेल
7219612203
फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन फोन नहीं उठाया जा रहा है।






