Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

आमला जनपद पंचायत में दुकानों की नीलामी बनी चर्चा का विषय 

By
On:

खबरवाणी

आमला जनपद पंचायत में दुकानों की नीलामी बनी चर्चा का विषय 

अनियमितताओं और सांठगांठ के गंभीर आरोप, राजस्व हानि की आशंका

आमला:

स्थानीय जनपद पंचायत आमला में हाल ही में संपन्न हुई 15 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। एसडीएम, जनपद अध्यक्ष गणेश यादव और जनपद सीईओ की मौजूदगी में हुई इस नीलामी प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, सांठगांठ और पक्षपात के आरोप सामने आए हैं, जिससे शहर के चौक-चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

 

दुकान नंबर 5 की बोली और ड्रामा।

 

नीलामी के दौरान सबसे बड़ा विवाद दुकान नंबर 5 को लेकर खड़ा हुआ। निर्धारित शुरुआती बोली 12 लाख रुपये से अचानक छलांग लगाकर सीधे 40 लाख रुपये बोल दी गई। इस अप्रत्याशित उछाल से वहां मौजूद अन्य उम्मीदवारों को प्रतिस्पर्धा का मौका ही नहीं मिला और इसे एक सोची-समझि पूर्व नियोजित साजिश बताया जा रहा है। हैरानी की बात यह रही कि शाम तक 40 लाख रुपये की ऊंची बोली लगाने वाला उम्मीदवार राशि जमा करने ही नहीं आया। अब शहर में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या यह महज एक नाटक था और क्या इस सांठगांठ के पीछे किसी जनप्रतिनिधि या उनके करीबी का हाथ है? नियमों के तहत यदि विजेता तय समय में राशि जमा नहीं करता है, तो बोली निरस्त कर पुनः नीलामी या अगले योग्य आवेदक को मौका मिलना चाहिए, लेकिन इस पर संशय बना हुआ है।

 

प्रतिस्पर्धा का अभाव और राजस्व की भारी हानि

 

प्रक्रिया के दौरान कुल 15 में से 9 दुकानों पर कोई प्रतिस्पर्धा ही नजर नहीं आई। इन दुकानों पर मात्र एक-एक ही आवेदन आया और मामूली 25,000 रुपये की बढ़त के साथ दुकानें आवंटित कर दी गईं। इतने कम आवेदनों का आना या तो व्यापक प्रचार-प्रसार की भारी कमी को दर्शाता है या फिर एक सोची-समझी सिंडिकेट बाजी को, जिससे जनपद को भारी राजस्व की हानि उठानी पड़ी है।

आरक्षित दुकानों में पात्रता पर फेरबदल के आरोप

बेरोजगार एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित दुकानों के आवंटन में भी नियमों को ताक पर रखने के आरोप लगे हैं। दुकान नंबर 6 के मामले में दो आवेदक मैदान में थे। आरोप है कि नीतू पंकज निवासी हसलपुर को पहले पात्र घोषित किया गया, लेकिन ऐन मौके पर उन्हें अपात्र कर दिया गया। जिससे इस दुकान पर अतिरिक्त राशि की बोली नहीं लग पाई जिससे राजस्व की हानि हुई इसके विपरीत, इसी दुकान पर जनपद अध्यक्ष के गृह ग्राम बोरी खुर्द के रहने वाले दूसरे आवेदक अजय यादव को दुकान आवंटित कर दी गई। इस प्रकार की कार्यप्रणाली ने चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा संदेह खड़ा कर दिया है।

अब देखना यह होगा कि क्या उच्च प्रशासनिक अधिकारी इस पूरी नीलामी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच करवाते हैं या इसे आपसी साठगांठ मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

For Feedback - feedback@example.com
Home Icon Home E-Paper Icon E-Paper Facebook Icon Facebook Google News Icon Google News