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रेलवे गेट पर मौत का खतरा: ओवरब्रिज निर्माण के चलते गड्ढों और जलभराव से रोज जाम, गेट के बीच फंस रहे वाहन
घोड़ाडोंगरी। घोड़ाडोंगरी रेलवे गेट पर बन रहे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अब लोगों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी और संभावित हादसे का कारण बनता नजर आ रहा है। निर्माण के चलते सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े बोल्डर, गड्ढे और बारिश का पानी जमा है। खराब सड़क के कारण वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति उस समय बनती है जब ट्रेन आने के कारण रेलवे गेट बंद किया जाता है। सड़क पर जाम और अव्यवस्थित यातायात के चलते कई बार वाहन समय पर रेलवे क्रॉसिंग पार नहीं कर पाते। ऐसे में गेट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और वाहन दोनों रेलवे गेट के बीच फंसने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
यदि इसी दौरान ट्रेन क्रॉसिंग पर आ जाए तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार आखिर क्यों किया जा रहा है?
बारिश में बढ़ी परेशानी
बारिश के बाद सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों और बड़े-बड़े बोल्डरों के कारण फिसलकर गिर रहे हैं। पैदल राहगीरों को भी पानी और कीचड़ के बीच से गुजरना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सड़क की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। न तो सड़क को सुरक्षित तरीके से समतल किया गया है और न ही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान दिखाई दे रहा है।
रेलवे या निर्माण एजेंसी—जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि खराब सड़क, गड्ढों, बोल्डरों और अव्यवस्थित यातायात के कारण कोई गंभीर दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
ओवरब्रिज निर्माण एक समन्वित परियोजना है और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार घोड़ाडोंगरी-सारनी मार्ग के ओवरब्रिज का निर्माण मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और रेलवे के समन्वय से किया जाना है। ऐसे में संबंधित निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और सड़क/रेलवे से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
हादसा होने के बाद जागेंगे जिम्मेदार?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि समस्या लगातार बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं। लोगों का सवाल है कि क्या किसी वाहन के रेलवे गेट के बीच फंसने या किसी व्यक्ति की जान जाने के बाद ही प्रशासन और संबंधित विभाग जागेगा?
लोगों की मांग है कि रेलवे गेट के आसपास तत्काल सड़क के गड्ढे भरे जाएं, बड़े बोल्डर हटाए जाएं, बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए और रेलवे गेट बंद होने से पहले वाहनों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए यातायात व्यवस्था बनाई जाए।
जनता का सीधा सवाल है—यदि आज इन अव्यवस्थाओं के कारण कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी रेलवे की होगी, निर्माण एजेंसी की, ठेकेदार की या संबंधित अधिकारियों की?




