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सोनखेड़ी में गूंज रहा आदिशक्ति की भक्ति और साधना का संदेश
मुलताई।श्रावण मास में ग्राम सोनखेड़ी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा एवं आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और साधना के वातावरण में आगे बढ़ रहा है। 18 अगस्त से प्रारंभ हुए इस आयोजन के पहले दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कलश यात्रा के साथ ही सोनखेड़ी की धरती पर देवी भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का विशेष वातावरण निर्मित हुआ।आयोजन की मुख्य आध्यात्मिक आकर्षण माँ बगलामुखी सिद्ध साधिका गुरुमाता माँ देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी के श्रीमुखारविंद से हो रही श्रीमद् देवी भागवत कथा है। प्रथम एवं द्वितीय दिवस की कथा में गुरुमाता ने माँ भगवती आदिशक्ति पराशक्ति की महिमा, शक्ति स्वरूप, भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चेतना के विभिन्न पक्षों पर श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान किया।आदिशक्ति की उपासना और साधना का विशेष मार्गदर्शन गुरुमाता ने अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शन में बताया कि सनातन परंपरा में आदिशक्ति को सृष्टि की मूल शक्ति के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है। माँ भगवती की उपासना केवल बाहरी कर्मकांड तक सीमित न रहकर श्रद्धा, संयम, साधना, आत्मचिंतन और गुरु मार्गदर्शन से जुड़ती है। कथा के दौरान माँ आदिशक्ति को प्रसन्न करने की पारंपरिक साधना-भावना, उपासना के विभिन्न आयामों तथा साधक के लिए आवश्यक आध्यात्मिक अनुशासन पर भी विशेष प्रकाश डाला। वहीं अखंड समाधिस्थ श्री श्री 1008 महंत सद्गुरुदेव ब्रह्मर्षि डॉ. सत्यनारायण गिरी गोस्वामी महाराज जी के दिव्य आशीर्वचन भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुए। सद्गुरुदेव ने साधना, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जीवन के महत्व को समझाते हुए श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।
उन्होंने श्री हनुमान महाराज एवं श्री बटुक भैरव जी की उपासना और साधना से जुड़े आध्यात्मिक पक्षों पर भी विशेष जानकारी प्रदान की। हनुमान जी की भक्ति, आत्मबल एवं समर्पण तथा बटुक भैरव उपासना के आध्यात्मिक महत्व को सरल रूप में समझाते हुए साधना मार्ग पर चलने वाले श्रद्धालुओं को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया गया।
तीसरे दिन भी रहेगा आध्यात्मिक मार्गदर्शन का विशेष आकर्षण
कथा के दो दिवस पूर्ण होने के बाद अब तीसरे दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन में दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक सद्गुरुदेव का विशेष आध्यात्मिक प्रवचन तथा दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का आयोजन होगा।
आगामी प्रवचनों में आत्मज्ञान, ब्रह्मज्ञान, समाधि तत्व, ध्यान, साधना तथा श्री हनुमान एवं श्री बटुक भैरव जी की उपासना जैसे आध्यात्मिक विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त होगा। आयोजकों के अनुसार कथा का उद्देश्य केवल पुराण श्रवण तक सीमित न रहकर श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार, साधना और आत्मचेतना से जोड़ना है।





