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भ्रष्टाचार की भेंट……. चिबड़ा नाला पुलिया निर्माण: दो महीने से फाइलों में दबी जांच, प्रशासन मौन
आमला। 15वें वित्त आयोग की राशि का बंदरबांट, सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई की शिकायतें बेअसर, घटिया निर्माण से ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश।
आमला। जनपद पंचायत आमला के अंतर्गत ग्राम पंचायत नांदपुर में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग और खुलेआम भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों और किसानों की सुविधा के लिए बनाया जा रहा पुलिया निर्माण कार्य शुरू से ही विवादों और घटिया निर्माण की भेंट चढ़ चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर मामले में सीएम हेल्पलाइन से लेकर ब्लॉक जनसुनवाई तक लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की जांच फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। स्थानीय प्रशासन की इस कछुआ चाल और उदासीन कार्यप्रणाली ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लाखों की योजना, नियमों की सरेआम धज्जियां
नांदपुर और बल्लाचला के मध्य स्थित चिबड़ा नाला पर किसानों और ग्रामीणों के सुगम आवागमन के लिए शासन के 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत पुलिया निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। लगभग 5 लाख 70 हजार रुपये की लागत से बनने वाली इस पुलिया के निर्माण में शासन के तय मापदंडों और तकनीकी नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मौके पर उपलब्ध निर्माण सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिससे पुलिया के भविष्य और राहगीरों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है। पहली ही बारिश में इस निर्माण के ढहने की आशंका से ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं।
अधिकारियों की फाइलों में कैद होकर रह गई ग्रामीणों की शिकायतें
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में हो रहे इस भारी भ्रष्टाचार की जानकारी संबंधित तकनीकी अधिकारियों और पंचायत के जिम्मेदारों को पहले से है। इसके बावजूद घटिया निर्माण को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ऐसा प्रतीत होता है कि जिला पंचायत सदस्य पति एवं वर्तमान सरपंच पति द्वारा अधिकारियों की आपसी साठगांठ के चलते ही स्वीकृत राशि में बाहरी भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन कार्य को बढ़ावा दिया जा रहा है निर्माण कार्य में हो रही तकनीकी मापदंडों की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में पुलिया निर्माण कार्य किया जा चुका है खास बात यह रही पूरे निर्माण कार्य में 400 फिट का एक डम्पर रेत, गिट्टी ,डस्त पुलिया पानी निकासी के लिए 6नग धोल एवं लगभग 100 बोरी सीमेंट एवं 10 दिवस तक रोजाना 7 मजदूरों की मजदूरी की गई है। क्षेत्र में 400 फीट डंपर रेत लगभग 30हजार गिट्टी 20हजार डस्ट 10हजार रुपए अनुमानित खर्च आया है इसके अलावा 06नग धोल की लगभग कीमत 48हजार रुपए है लगभग 100 बोरी सीमेंट जिसकी अनुमानित कीमत 30 हजार एवं 07 दिवस मजदूरो की अनुमानित मजदूरी लगभग 28 हज़ार रुपए खर्च किए गए हैं निर्माण में अन्य खर्च 4 हजार रुपए मिलकर अनुमानित खर्च पुलिया निर्माण में 1 लाख 70 हजार रुपए अनुमानित खर्च हुआ है अतिरिक्त अगर खर्च और ज्यादा भी हुआ था लगभग निर्माण कार्य 2लाख के अंदर निर्माणकार्य पूर्ण कराया जा चुका है लेकिन निर्माण कार्य के लिए 5लाख 70 हजार रुपए की राशि कि स्वीकृति प्राप्त हुई
है
भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में जुटे जिम्मेदार अधिकारी
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में हो रहे इस भारी भ्रष्टाचार की जानकारी संबंधित तकनीकी अधिकारियों और पंचायत के जिम्मेदारों को पहले से है। इसके बावजूद घटिया निर्माण को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य में राजनीतिक हस्तक्षेप एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि के परिवार द्वारा निर्माण कार्य कराए जाने के चलते कहीं ना कहीं जिला पंचायत सदस्य पति एवं सरपंच पति के साथ अधिकारियों की आपसी साठगांठ के चलते ही जनता के टैक्स के पैसों की इस तरह बर्बादी की जा रही है और गुणवत्ताहीन कार्य को बढ़ावा दिया जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने बयां की प्रशासनिक अनदेखी की दास्तान
निर्माण कार्य को लेकर जब मुख्य शिकायतकर्ता से विस्तृत चर्चा की गई, तो उन्होंने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। शिकायतकर्ता ने चर्चा के दौरान बताया कि उन्होंने पुलिया निर्माण में इस्तेमाल हो रही घटिया सामग्री और नियमों के उल्लंघन के पुख्ता प्रमाणों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार चक्कर काटने के बाद भी अधिकारी केवल आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, ऐसा महसूस होता है कि ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी जानबूझकर मामले को रफा-दफा करने और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण ग्रामीणों का सरकारी तंत्र और जनसुनवाई जैसी व्यवस्थाओं से भरोसा उठता जा रहा है।
निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवाल।
पंचायत खाते में शासन द्वारा स्वीकृत राशि प्राप्त होने से पूर्व निर्माण कार्य कैसे प्रारंभ हुआ।
निर्माण कार्य के समय पंचायत खाते में राशि उपलब्ध न होने के बाद नियम विरोधी निर्माण कार्य की शिकायत के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हूं।
स्थानीय प्रशासन शिकायत के समय नियम विरुद्ध निर्माण कार्य बात कर भुगतान करने की बात कही थी फिर भुगतान कैसे हुआ।
निर्माण कार्य की राशि शासन के खाते 90प्रतिशत कार्य होने के लगभग एक माह राशि पंचायत खाते हुई हस्तांतरित
विभागीय अधिकारियों की जानकारी में विरोधाभास
मौखिक शिकायत के 7 जून 26को हुई चर्चा में अधिकारियों से प्राप्त जानकारी
ग्राम पंचायत सचिव गुलाबराव पंडाग्रे द्वारा प्राप्त जानकारी
पुलिया निर्माण के संबंध में स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजा था लेकिन स्वीकृति के संबंध में ग्राम पंचायत अधिकारियों की समक्ष डीपीआर की संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। अगर निर्माण कार्य हो रहा है तो इसका भुगतान ग्राम पंचायत द्वारा नहीं किया जाएगा। निर्माण स्थल का जिओ टेक एवं टी एस- ए एस की करवाई नहीं हुई है जिसके चलते में ग्राम पंचायत द्वारा निर्माण कार्य का भुगतान नहीं किया जाएगा।
जनपद पंचायत उपयंत्री अमित तिवारी
द्वारा प्राप्त जानकारी पुलिया निर्माण कार्य की स्वीकृति जिला पंचायत सदस्य द्वारा ग्राम पंचायत को दिलाई गई है। जिसके चलते जिला पंचायत सदस्य के पति द्वारा निर्माण की एजेंसी के साथ मिलकर निर्माण कार्य कर रहे हैं।
12 जून को लिखित शिकायत के बाद स्थानीय अधिकारियों से निर्माण कार्य के संबंध में जानकारी
ग्राम पंचायत सचिव गुलाब पंडाग्रे निर्माण कार्य को अवैध बताया है। उनका कहना है न तो पंचायत खाते में राशि आई है और न ही इस, टी एस- ए एस और जियो टैग की प्रक्रिया पूरी हुई है। सचिव के अनुसार उन्हें केवल 10 जून 2026 को उपयंत्री द्वारा मौखिक जानकारी दी गई थी, जबकि निर्माण कार्य बिना आवश्यक अनुमतियों के चल रहा है।
उपयंत्री अमित तिवारी का कहना है चिबड़ा नाला पर पुलिया निर्माण कार्य 15वें वित्त आयोग की स्वीकृत राशि के अंतर्गत विधिवत रूप से किया जा रहा है और कार्य प्रगति पर है।
जनपद सीईओ आमला पंकज दारोथिया निर्माण कार्य के संबंध में प्राप्त जानकारी में बताया कि निर्माण कार्य के लिए टीएस, ए एस , डीपीआर और जियो टैग अनिवार्य हैं। इनके बिना कोई भी निर्माण कार्य वैध नहीं माना जा सकता। यदि राशि आवंटित नहीं हुई है तो भुगतान भी संभव नहीं है।
इनका कहना है
ग्राम पंचायत नांदपुर सचिव
गुलाबराव पंडाग्रे
निर्माण कार्य का भुगतान लगभग 20प्रतिशत किया जा चुका है
इनका कहना है
जनपद सीईओ आमला
पंकज दारोथिया
निर्माण एजेंसी द्वारा निर्माण कार्य स्वीकृत के बाद कराया जा सकता है। शिकायतकर्ता को अगर शिकायत के संबंध में किसी भी प्रकार की आपत्ति है तो वह अपनी शिकायत उच्च अधिकारी को कर सकता है





