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श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का वृतांत सुनाने पर खुशी से झूम उठे श्रृध्दालु

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खबरवाणी

श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का वृतांत सुनाने पर खुशी से झूम उठे श्रृध्दालु

बुरहानपुर। लालबाग स्थित श्रीराम मंदिर चिंचाला राम दरबार में सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन महायज्ञ के साथ सात दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन भी किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन कथा वाचक प.पू. साध्वी ममता दीदी के द्वारा भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का वृतांत सुनाया गया। इस दौरान उन्होने कहा कि त्रेतायुग में जब लंकापति रावण के अत्याचार से तीनों लोक कांप उठे थे, तब पृथ्वी गाय का रूप धारण कर देवताओं के साथ ब्रह्मा जी के पास गई। ब्रह्मा जी सभी को लेकर भगवान विष्णु के पास क्षीरसागर पहुंचे। तब आकाशवाणी हुई कि भगवान स्वयं अयोध्या में राजा दशरथ के पुत्र के रूप में अवतार लेंगे।

अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के यहां कोई संतान नहीं थी। गुरु वशिष्ठ के आदेश से उन्होंने महर्षि ऋ ंगी को बुलाकर पुत्रेष्ठि यज्ञ कराया। यज्ञ की पूर्णाहुति पर यज्ञकुंड से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुआ, जिसके हाथ में स्वर्ण पात्र में खीर थी। उसने कहा यह प्रसाद रानियों को दो मनोकामना पूर्ण होगी। राजा ने वह प्रसाद कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को दिया। समय आने पर चैत्र शुक्ल नवमी, अभिजीत मुहूर्त, बुधवार के दिन मध्याह्न काल में जब सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र में थे, तब स्वयं परात्पर ब्रह्म ने कौशल्या की कोख से जन्म लिया।

तुलसीदास वर्णन करते हैं

ऋ भ प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी

उस समय मंदिरों में शंख बजे, आकाश में दुंदुभी बजी।

उन्होने कहा कि शास्त्रों के अनुसार श्रीराम के जन्म के उस अलौकिक क्षण में 33 कोटि देवी देवता मानव रूप धारण कर अयोध्या आ पहुंचे। ब्रह्माए इंद्र, वरुण, सूर्य, चंद्र, वायु, गंधर्व, किन्नर, सिद्ध, मुनि सभी ने अदृश्य रूप से या साधारण मनुष्य के वेश में बालक राम के दर्शन किए। आकाश से देवताओं ने पुष्पों की वर्षा की, अप्सराओं ने नृत्य किया, गंधर्वों ने मंगल गान गाए। देवता धन्य हो गए कि आज सृष्टि के पालनहार ने पृथ्वी पर अवतार लिया हंै। बाल्यकाल में चारों भाइयों का लालन पालन बड़े प्रेम से हुआ। गुरु वशिष्ठ ने नामकरण किया श्रमन्ते योगिनो यस्मिन् स राम:श्। भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न उनके साथ छाया की तरह रहते। अयोध्या के राज आंगन में राम घुटनों के बल चलते, तो माताएं निहाल हो जातीं। कभी माखन के लिए मचलते कभी सखाओं के साथ गिल्ली डंडा खेलते। गुरु वशिष्ठ के आश्रम में उन्होंने वेद, वेदांग, धनुर्वेद और राजनीति की शिक्षा ली।

श्रीराम मंदिर संस्थान के सचिव गणेश दुनगे ने बताया कि सात दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन का समापन विशेष पूजन, महाआरती और विशाल महाप्रसादी के साथ किया जाएगा। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। श्रीराम कथा के शुभारंभ के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आयोजकों ने शहर के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से पूरे सप्ताह आयोजित होने वाली कथा में सहभागिता कर धर्म लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया हैं। इस दौरान संतोष पवार, बंशीलाल गुप्ता, राजेश श्रीवास, गोलू श्रीवास, शैलेन्द्र साहू, शकुन्तला दुनगे, संपतबाई वर्मा, लालचंद साहू, नीता वर्मा, गजेन्द्र भाई सहित सैकड़ो की संख्या में धर्मप्रेमी मौजूद रहे।

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