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शिव धाम झिरी पहुंच मार्ग हुआ दलदल,सुध नही ले रहे जनप्रतिनिधि
मुलताई। प्रभात पट्टन के पास स्थित भक्तो की आस्था केंद्र शिवधाम ‘झिरी मंदिर’ तक पहुँचने वाला मुख्य मार्ग पिछले कई वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। मंदिर जाने वाले दलदली रास्ते और मार्ग में पुलिया न होने के कारण, प्रतिदिन दर्शन के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें जान जोखिम में डालकर सफर तय करना पड़ता है। सालों से बनी इस समस्या और प्रशासन के ढुलमुल रवैये को लेकर झिरी शिव धाम मंदिर समिति और शिवभक्तों ने कड़ा रोष व्यक्त किया है। 5 वर्षों से सिर्फ संघर्ष और ज्ञापन मंदिर समिति के अध्यक्ष सोनू प्रणय पटेल, कोषाध्यक्ष शुभम शिवहरे, अंकुर करदे और प्रमोद डाबरे ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मार्ग को दुरुस्त करने और नई पुलिया के निर्माण को लेकर समिति पिछले 5 वर्षों से लगातार संघर्षरत है। अपनी मांग को लेकर अब तक कई बार तहसील कार्यालय के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर नतीजा सिफर ही रहा है।
*खोखले निकले सांसद-विधायक के वादे*
समिति के पदाधिकारियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब भी क्षेत्र के विधायक और सांसद से इस गंभीर विषय पर चर्चा की जाती है, तो उनकी तरफ से केवल “जल्द ही रोड और पुलिया बनाने” का रटा-रटाया आश्वासन दे दिया जाता है। धरातल पर आज तक कोई कार्य शुरू नहीं हो सका है। जनप्रतिनिधियों की इस निरंतर अनदेखी से शिवभक्तों व ग्रामीणों में भारी निराशा है। उबड़-खाबड़ रास्ते और पुलिया के अभाव के कारण विशेषकर बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ती है।
*मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी*
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए समिति के उपाध्यक्ष गुलशन बंजारे, सदस्य अश्विन बराई, सुनील चौधरी, सुनील अनवाने सहित समिति के सभी सदस्यों ने शासन-प्रशासन से निवेदन किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आस्था को ध्यान में रखते हुए अविलंब सड़क व पुलिया का निर्माण स्वीकृत कर कार्य शुरू करवाया जाए।
समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस ज्वलंत समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो मंदिर समिति और क्षेत्र के श्रद्धालुओं को मजबूरन उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।





