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खबर का हुआ असर: तारा पंचायत मामले में कलेक्टर हुए सख्त, तीन सदस्यीय जांच दल करेगा पड़ताल
जांच के आदेश जारी होते ही वर्षों से अधूरे पड़े निर्माण कार्यों में फिर दिखी हलचल, अब उठ रहा सवाल-आखिर शिकायतों से पहले क्यों नहीं पूरे हुए ये काम?
शाहपुर। ग्राम पंचायत तारा में निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं और वर्षों से अधूरे पड़े विकास कार्यों को लेकर लगातार प्रकाशित समाचारों तथा ग्रामीणों की शिकायतों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। जिला प्रशासन द्वारा जांच के आदेश जारी होने के बाद पंचायत में लंबे समय से बंद पड़े कुछ निर्माण कार्यों को दोबारा शुरू करा दिया गया है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि यदि कार्य पूरे कराए जा सकते थे तो वर्षों तक उन्हें अधूरा क्यों छोड़ दिया गया?
ग्रामीणों का कहना है कि बजरंग मंदिर के पास ₹1.50 लाख की लागत से बनने वाला छत चौपाल, ढोलन मैया मंदिर के पास स्वीकृत चौपाल तथा फुलेसिंह के घर के पास स्वीकृत चौपाल लंबे समय से अधूरे पड़े थे। कई बार शिकायतें करने के बावजूद इन कार्यों को पूरा कराने की दिशा में कोई पहल नहीं हुई। लेकिन जैसे ही लगातार समाचार प्रकाशित हुए और जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए, इन कार्यों में अचानक फिर से हलचल शुरू हो गई।
इधर, कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल गठित किए जाने के बाद अब पंचायत के कार्यों पर प्रशासन की नजर है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य पहले से निर्धारित समय में पूरे होने थे तो शिकायतों और जांच के आदेश का इंतजार क्यों किया गया?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में अभी भी कई स्वीकृत निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। उनका आरोप है कि केवल कुछ कार्यों को शुरू कर देने से पूरे मामले की सच्चाई नहीं बदल जाती। उनका कहना है कि जांच केवल वर्तमान में चल रहे कार्यों तक सीमित न रहकर उन सभी निर्माण कार्यों की होनी चाहिए जो वर्षों से अधूरे पड़े रहे हैं या जिनका भुगतान होने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच दल यह भी पता लगाए कि जिन कार्यों को वर्षों तक अधूरा छोड़ दिया गया, उन्हें समय पर पूरा क्यों नहीं कराया गया, निर्माण में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है और यदि राशि का आहरण हो चुका था तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते आपत्ति क्यों नहीं दर्ज की।
इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या जांच केवल औपचारिकता साबित होगी या फिर वर्षों से लंबित निर्माण कार्यों, भुगतान, गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने तक पहुंचेगी।





