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आखिर क्या देख रहे हैं जिम्मेदार इंजीनियर? निर्माण में लगातार मिल रहीं खामियां
सुरक्षा, गुणवत्ता, टेस्टिंग और निर्माण सामग्री पर लगातार उठ रहे सवाल; स्थानीय लोगों ने पीआईयू की मॉनिटरिंग पर जताई गंभीर आपत्ति और निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग।
भौंरा। संदीपनी विद्यालय शाहपुर में निर्माणाधीन 100 सीटर छात्रावास को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच अब पीआईयू की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। पहले मजदूरों की सुरक्षा में लापरवाही, फिर निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड का अभाव, इसके बाद गुणवत्ता परीक्षण को लेकर उठे सवाल और अब निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर स्थानीय लोगों की आपत्तियों ने विभागीय मॉनिटरिंग की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित और तकनीकी निगरानी वास्तव में की जा रही होती, तो एक के बाद एक इस तरह की शिकायतें सामने नहीं आतीं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में उपयोग हो रही सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का समय-समय पर परीक्षण और सत्यापन होना चाहिए था, लेकिन मौके पर ऐसी सख्ती दिखाई नहीं दे रही है। सरकारी निर्माण कार्यों में विभागीय इंजीनियरों की जिम्मेदारी केवल माप पुस्तिका एमबी तैयार करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण का निरीक्षण करना, उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, तकनीकी मानकों का पालन कराना और कमी मिलने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करना भी उनकी जिम्मेदारी होती है। इसके बावजूद यदि लगातार गुणवत्ता और सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं तो यह जानना आवश्यक है कि अब तक विभागीय अधिकारियों ने कितनी बार स्थल निरीक्षण किया, निरीक्षण के दौरान क्या कमियां दर्ज कीं और उनके निराकरण के लिए क्या कार्रवाई की गई। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निर्माण कार्य के अब तक के सभी निरीक्षण अभिलेख, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और विभागीय टिप्पणियों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निगरानी व्यवस्था कागजों तक सीमित थी या वास्तव में मौके पर प्रभावी ढंग से लागू की गई।
लोगों का कहना है कि यह केवल एक भवन का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी धन और भविष्य में इस छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराकर यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार के साथ-साथ निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।





