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स्थानांतरण आदेश बना कागज का टुकड़ा? तीन सप्ताह बाद भी दर्जनों शिक्षक कार्यमुक्त नहीं!
दो सप्ताह में रिलीव करने के स्पष्ट निर्देश, फिर भी शाहपुर, चिचोली और घोड़ाडोंगरी में आदेश ठंडे बस्ते में; विभागीय व्यवस्था पर बड़े सवाल
शाहपुर -जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से 15 जून को जारी जिला स्तरीय स्थानांतरण आदेश को तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन शाहपुर, चिचोली और घोड़ाडोंगरी विकासखंड के दर्जनों शिक्षक आज भी पुराने विद्यालयों में ही जमे हुए हैं। जबकि स्थानांतरण आदेश में स्पष्ट निर्देश है कि दो सप्ताह के भीतर संबंधित कर्मचारी को कार्यमुक्त करना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो सक्षम अथवा वरिष्ठ अधिकारी द्वारा एकतरफा कार्यमुक्त करते हुए उसी दिन से स्थानांतरण प्रभावी माना जाएगा। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार नंदकिशोर खातरकर का स्थानांतरण प्राथमिक शाला चीखल्दा खुर्द से पीएम श्री शाला भयावाड़ी, अल्केश करछले एवं सुनीता करछले का स्थानांतरण माध्यमिक शाला टडार से माध्यमिक शाला भतोडी तथा उर्मिला का स्थानांतरण प्राथमिक शाला निशाना से प्राथमिक शाला झापड़ी किया गया, लेकिन अब तक उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है। सूत्रों का दावा है कि ऐसे केवल चार नहीं, बल्कि तीनों विकासखंडों में दर्जनों शिक्षक कार्यमुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आदेश में समय-सीमा और एकतरफा कार्यमुक्ति का स्पष्ट प्रावधान है, तो आखिर किसके संरक्षण में इन आदेशों की अनदेखी हो रही है? यदि विभाग अपने ही आदेशों का पालन नहीं करा पा रहा है, तो स्थानांतरण नीति की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
आदेश में यह भी उल्लेख है कि कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही नई संस्था से वेतन आहरित होगा। यदि पूर्व संस्था से वेतन जारी रहता है तो इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। ऐसे में लंबे समय तक कार्यमुक्ति नहीं होने की स्थिति में प्रशासनिक और वित्तीय जवाबदेही किसकी होगी, यह भी चर्चा का विषय बन गया है।
अब निगाहें जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या विभाग अपने ही आदेशों को लागू करा पाएगा, या फिर स्थानांतरण आदेश केवल औपचारिक दस्तावेज बनकर रह जाएंगे?
इनका कहना
“स्थानांतरण आदेश के संबंध में अन्य आवश्यक निर्देशों और प्रशासनिक पहलुओं पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसी कारण संबंधित कर्मचारियों को अभी कार्यमुक्त नहीं किया गया है। आज इस संबंध में अंतिम निर्णय लेने की स्थिति में हूं। इसके अलावा अन्य जिलों से स्थानांतरित होकर बैतूल आए शिक्षकों की पदस्थापना और समायोजन भी किया जाना है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
— वात्सला शिवहरे, सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य, बैतूल





