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पंचायत कार्यालय में लटका मिला ताला, ग्रामीण बोले – कभी खुलती है पंचायत, कभी बंद रहती है
ग्राम पंचायत टिमरनी में सचिव की मनमानी से ग्रामीण परेशान, छोटे-छोटे कार्यों के लिए लगाना पड़ रहा बार-बार चक्कर
भौंरा। जनपद पंचायत शाहपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत टिमरनी में पंचायत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने पंचायत सचिव पर मनमानी, अनियमित उपस्थिति और पंचायत कार्यालय को समय से पहले बंद करने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत कार्यालय अक्सर बंद रहता है, जिससे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आवेदन, पेंशन, समग्र आईडी, मजदूरी भुगतान और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लोगों को बार-बार पंचायत के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सोमवार को जब पत्रकार पंचायत कार्यालय पहुंचे तो शाम लगभग 4 बजे पंचायत कार्यालय पर ताला लटका मिला। कार्यालय बंद मिलने पर आसपास मौजूद ग्रामीणों से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि पंचायत कभी-कभार ही खुलती है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत का कोई निश्चित संचालन समय नहीं है और सचिव अपने हिसाब से कार्यालय खोलते और बंद करते हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सचिव के अपने ही नियम चल रहे हैं। जब इच्छा होती है तब पंचायत खुलती है और जब निजी कार्य होता है तो कार्यालय में ताला डलवा दिया जाता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पंचायत के अन्य कर्मचारी भी जिम्मेदारी से कार्य नहीं कर रहे हैं, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।
जब इस संबंध में पंचायत सचिव सुनील सुनील कासदे से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें जनपद पंचायत शाहपुर में कार्य होने के कारण वहां जाना पड़ा, इसलिए पंचायत कार्यालय जल्दी बंद कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि रोजगार सहायक किसी अन्य कार्य से बाहर गए हुए हैं।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत कार्यालय बंद रहने की स्थिति नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से यही व्यवस्था चल रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए और कार्यालय संचालन की निगरानी की जाए।
नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल
पंचायत संचालन से जुड़े नियमों के अनुसार ग्राम पंचायत कार्यालय का नियमित रूप से निर्धारित समय तक खुला रहना अनिवार्य है, ताकि ग्रामीणों को शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके। पंचायत सचिव एवं संबंधित कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रशासनिक जिम्मेदारी मानी जाती है। इसके बावजूद यदि कार्यालय समय से पहले बंद मिलता है तो यह सीधे तौर पर ग्रामीणों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जानकारों का मानना है कि पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं। यदि वहीं ताले लटकने लगें तो शासन की योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह जाती हैं।
जांच करवाता हूं- पंचायत इंस्पेक्टर
इस मामले में पंचायत इंस्पेक्टर जी पी बास्कर से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि पंचायत कार्यालय बंद क्यों था।





