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छात्रावास निर्माण में गुणवत्ता पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
बीजादेही में बन रहे 100 सीटर कस्तूरबा गांधी छात्रावास के निर्माण कार्य पर गंभीर आरोप, पीआईयू विभाग ने दोबारा निरीक्षण की बात कही
भौंरा । विकासखंड के ग्राम बीजादेही में निर्माणाधीन 100 सीटर कस्तूरबा गांधी छात्रावास का कार्य इन दिनों सवालों के घेरे में है। करीब 1 करोड़ 74 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस छात्रावास में घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के आरोप सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है।
निर्माण कार्य बैतूल की युग कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराया जा रहा है, जबकि इसकी निगरानी की जिम्मेदारी पीआईयू विभाग के पास है। निर्माण स्थल पर सामने आई तस्वीरों और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने भवन की गुणवत्ता और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने पर सवाल
निर्माण स्थल पर परियोजना संबंधी सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सामान्यतः सरकारी निर्माण कार्यों में लागत, निर्माण एजेंसी, समय-सीमा और तकनीकी स्वीकृति संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती है, लेकिन यहां ऐसी कोई जानकारी मौके पर दिखाई नहीं दी। इससे निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ईंटों और सरियों की गुणवत्ता पर आपत्ति
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटें कमजोर गुणवत्ता की हैं और आसानी से टूट रही हैं। वहीं भवन निर्माण में उपयोग किए जा रहे लोहे के सरियों में जंग लगी सामग्री के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है।
तकनीकी जानकारों के अनुसार यदि जंग लगे सरियों का उपयोग किया जाता है तो इससे भवन की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में छात्रावास जैसे आवासीय भवन में गुणवत्ता को लेकर अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक मानी जाती है।
कॉलम और बीम में हनीकॉम्ब जैसी स्थिति
निर्माणाधीन कॉलम और बीम में हनीकॉम्ब जैसी स्थिति दिखाई देने की बात भी सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति प्रायः कंक्रीट के सही कम्पेक्शन नहीं होने या निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी सावधानी नहीं बरतने के कारण उत्पन्न होती है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया जाए तो इससे भवन की दीर्घकालिक मजबूती प्रभावित हो सकती है।
गुणवत्ता जांच व्यवस्था पर भी उठे सवाल
निर्माण स्थल पर गुणवत्ता परीक्षण संबंधी कोई व्यवस्था नजर नहीं आने पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। निर्माण सामग्री की नियमित जांच और तकनीकी परीक्षण बड़े निर्माण कार्यों में आवश्यक माने जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर प्रभावी निगरानी और परीक्षण हो तो निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। स्थानीय स्तर पर अब निर्माण सामग्री के सैंपल की लैब जांच कराने और पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि छात्राओं के उपयोग के लिए बनने वाले भवन में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
दोबारा किया जाएगा निरीक्षण
कुछ समय पूर्व निर्माण स्थल का निरीक्षण किया गया था और उस समय कार्य संतोषजनक पाया गया था। उन्होंने कहा कि कॉलम में दिखाई दे रही हनीकॉम्ब जैसी स्थिति लकड़ी की प्लाई उपयोग किए जाने के कारण हो सकती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनकी ड्यूटी जनगणना कार्य में लगी हुई है। जनगणना कार्य पूर्ण होने के बाद दोबारा निर्माण स्थल का निरीक्षण किया जाएगा और आवश्यक परीक्षण भी कराए जाएंगे।
रवि अहिरवार इंजीनियर
पीआईयू विभाग





