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35 साल से सक्रिय राजनीति में प्रदीप नागले, फिर चर्चा में—क्या मिलेगी जिम्मेदारी
खबरवाणी न्यूज़ रफीक
सारनी। क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रदीप नागले एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं में आ गए हैं। करीब 25 साल पहले आमला विधानसभा से चुनाव लड़ चुके नागले का राजनीतिक सफर काफी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है।
राजनीति में सक्रिय होने से पहले वे आर्केस्ट्रा से जुड़े रहे और बाद में अस्पताल में नौकरी करते हुए भी सामाजिक गतिविधियों में भाग लेते रहे। इसके साथ ही वे श्रमिक संगठनों और विभिन्न आंदोलनों से भी लगातार जुड़े रहे।
करीब 25 साल पहले कोयला डंपर मालिकों द्वारा ड्राइवरों के वेतन में कटौती के खिलाफ हुए आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उस आंदोलन में उनके प्रयासों से ड्राइवरों को राहत भी मिली थी। इसके बाद से वे कांग्रेस के हर छोटे-बड़े आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
पार्टी में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा भी कई बार सामने आई, लेकिन हर बार अंतिम समय में उनका नाम पीछे रह गया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, वे कई बार गुटबाजी और राजनीतिक विरोध का भी शिकार हुए।
जलावर्धन योजना को लेकर कांग्रेस द्वारा किए गए धरना-प्रदर्शन के दौरान, कई नेताओं पर वारंट जारी होने के कारण वे कुछ दिनों तक सामने नहीं आ सके, लेकिन उस दौरान भी आंदोलन की जिम्मेदारी उनके समर्थकों ने संभाली और नागले की भूमिका अहम बनी रही।
प्रदीप नागल का संबंध आमला से रहा है, जबकि शोभापुर-पाथाखेड़ा उनकी कर्मभूमि रही और सारनी में उनका पारिवारिक जुड़ाव है। क्षेत्र में उनकी पकड़ और सक्रियता के चलते उन्हें कई बार विधायक पद के संभावित दावेदार के रूप में भी देखा जाता रहा है।
हाल ही में ठेका मजदूरों के लंबे आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी के बाद एक बार फिर उनका नाम चर्चा में है। अब देखना होगा कि कांग्रेस पार्टी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देती है या नहीं, और उनका राजनीतिक भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ता है।





