AAP : सबसे बड़ा पेंच यही है भाई! अगर Arvind Kejriwal, Raghav Chadha को पार्टी से निकाल भी दें, तो भी उनकी राज्यसभा की सदस्यता नहीं जाएगी। वो “unattached MP” बनकर संसद में बैठे रहेंगे और खुलकर पार्टी के खिलाफ बोल सकते हैं। यानी “निकालो तो भी मुसीबत, रखो तो भी टेंशन” वाली हालत है।
कब छिनती है सांसद की सदस्यता?
नियम साफ कहते हैं कि सांसद की कुर्सी सिर्फ दो हालत में जाती है—या तो वो खुद इस्तीफा दे, या फिर पार्टी के व्हिप के खिलाफ वोट करे। केजरीवाल चाहते हैं कि राघव खुद इस्तीफा दें, लेकिन राघव ने साफ मना कर दिया है। देसी अंदाज में—“ना खुद जाएंगे, ना आसानी से हटाए जाएंगे”।
व्हिप और बोलने पर रोक की चाल
AAP ने राज्यसभा में चिट्ठी लिखकर राघव को बोलने का मौका कम करने की कोशिश की है। ये एक तरह की “साइडलाइन पॉलिटिक्स” है। मतलब पार्टी उन्हें बाहर नहीं निकाल रही, लेकिन उनकी ताकत धीरे-धीरे कम कर रही है। “सीधे वार नहीं, धीरे-धीरे किनारे लगाओ” वाली रणनीति चल रही है।
निकाल दिया तो बन सकते हैं बड़ा खतरा
अगर राघव चड्ढा को बाहर किया गया, तो वो किसी दूसरी पार्टी में जाकर अंदर की बातें खोल सकते हैं। राजनीति में अंदर की जानकारी बहुत कीमती होती है। इसलिए केजरीवाल नहीं चाहते कि उनका पुराना भरोसेमंद साथी विरोधी कैंप में जाकर “राज खोल दे”।
पंजाब और इमेज का भी बड़ा खेल
राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और वहां AAP की जीत में उनका बड़ा रोल रहा है। उन्हें निकालना मतलब पंजाब यूनिट में बवाल खड़ा करना। साथ ही, राघव की इमेज एक युवा और पढ़े-लिखे नेता की है। अगर उन्हें निकाला गया, तो वो “विक्टिम कार्ड” खेल सकते हैं, जिससे पार्टी की छवि खराब हो सकती है।





