Petrol-Diesel Prices: मिडिल ईस्ट में Iran, Israel और United States के बीच तनाव के चलते कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा। खासकर Strait of Hormuz पर संकट के कारण दुनियाभर में तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा था। लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे—यही सवाल हर किसी के मन में है।
PM मोदी ने बताया असली कारण
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नोएडा में एक रैली के दौरान इसका सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की स्मार्ट प्लानिंग और “देसी जुगाड़” यानी एथेनॉल ब्लेंडिंग ने बड़ा काम किया है। इससे भारत को विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग बना गेम चेंजर
सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की रणनीति अपनाई, जिससे अब E20 (20% एथेनॉल) तक पहुंच गए हैं। अगर ये न होता, तो भारत को हर साल करोड़ों लीटर अतिरिक्त कच्चा तेल आयात करना पड़ता। एथेनॉल गन्ने जैसे फसलों से बनता है, जिससे किसानों की कमाई भी बढ़ रही है—यानी “दोनों हाथ में लड्डू”।
रेलवे और मेट्रो से भी बचा ईंधन
पिछले कुछ सालों में रेलवे का तेजी से विद्युतीकरण हुआ है, जिससे डीजल की खपत में भारी कमी आई है। इसके अलावा शहरों में मेट्रो नेटवर्क बढ़ने से भी पेट्रोल-डीजल की मांग घटी है। इसका सीधा असर ये हुआ कि देश में फ्यूल पर दबाव कम पड़ा।
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कैसे बची जनता की जेब?
सरकार के अनुसार, भारत अब करीब 20 अरब लीटर एथेनॉल का उत्पादन कर रहा है, जिसमें से आधा पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। इसी वजह से जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ, तब भी भारत में दाम नहीं बढ़े। देसी अंदाज में समझें तो “सरकार ने पहले से ही बैकअप प्लान तैयार कर रखा था”।




