US Impeachment Motion Process: अमेरिका की राजनीति में इम्पीचमेंट मोशन (महाभियोग प्रस्ताव) एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके जरिए राष्ट्रपति जैसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को पद से हटाया जा सकता है। भले ही अब तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को इम्पीचमेंट के जरिए हटाया नहीं गया हो, लेकिन तीन राष्ट्रपतियों के खिलाफ यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हाल के समय में डोनाल्ड ट्रंप को लेकर फिर से इम्पीचमेंट की चर्चा तेज है। आइए आसान देसी हिंदी में समझते हैं कि अमेरिका में इम्पीचमेंट आखिर होता कैसे है।
इम्पीचमेंट मोशन क्यों लाया जाता है?
अमेरिकी संविधान के मुताबिक, अगर राष्ट्रपति पर देशद्रोह, रिश्वतखोरी या गंभीर अपराध (High Crimes and Misdemeanors) का आरोप लगे, तो उनके खिलाफ इम्पीचमेंट लाया जा सकता है। इसका मकसद सत्ता का दुरुपयोग रोकना और लोकतंत्र की रक्षा करना होता है। हालांकि आरोप लगना और दोषी साबित होना—दोनों अलग बातें हैं।
इम्पीचमेंट प्रस्ताव कौन लाता है?
अमेरिका में इम्पीचमेंट प्रस्ताव कांग्रेस के निचले सदन—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में लाया जाता है। इस सदन के सदस्य राज्यों की जनसंख्या के आधार पर चुने जाते हैं। इम्पीचमेंट प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए 51% साधारण बहुमत की जरूरत होती है। अगर बहुमत मिल जाता है, तो राष्ट्रपति पर औपचारिक रूप से आरोप तय हो जाते हैं।
प्रस्ताव के बाद क्या होता है ट्रायल में?
हाउस से प्रस्ताव पास होने के बाद मामला सीनेट में जाता है, जहां पूरा ट्रायल होता है। इस ट्रायल की अध्यक्षता अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस करते हैं। राष्ट्रपति अपने बचाव में वकील रख सकते हैं। हाउस के सदस्य अभियोजक की भूमिका निभाते हैं, जबकि सीनेटर जूरी की तरह काम करते हैं।
राष्ट्रपति को हटाने के लिए कितने वोट चाहिए?
सीनेट में राष्ट्रपति को दोषी ठहराने और पद से हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत (67% वोट) जरूरी होता है। अगर इतने वोट मिल जाते हैं, तो राष्ट्रपति को तुरंत पद छोड़ना पड़ता है। इसके बाद उप-राष्ट्रपति शेष कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालते हैं।
अब तक किन राष्ट्रपतियों पर लगा इम्पीचमेंट?
अब तक तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर इम्पीचमेंट की कार्रवाई हो चुकी है।
- एंड्रयू जॉनसन (1868): कांग्रेस से टकराव और कानून उल्लंघन के आरोप।
- बिल क्लिंटन (1998): झूठी गवाही और न्याय में बाधा डालने के आरोप।
- डोनाल्ड ट्रंप (2019 और 2021): सत्ता के दुरुपयोग और चुनाव परिणाम पलटने की कोशिश के आरोप।
तीनों ही मामलों में सीनेट में जरूरी बहुमत नहीं मिला, इसलिए कोई भी राष्ट्रपति पद से नहीं हटाया गया।





