अरे भाई, मामला अब सीधा-सीधा तेल और पैसे का हो गया है। अमेरिका ने ठान लिया है कि ईरान की कमाई की नस पर ही वार करना है। यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने साफ कहा है कि अब ईरान को तेल बेचने नहीं दिया जाएगा। मतलब साफ है—तेल नहीं बिकेगा तो पैसा नहीं आएगा, और बिना पैसे के ईरान की हालत टाइट हो सकती है।
खार्ग आइलैंड बनेगा सबसे बड़ा संकट!
देखो जी, ईरान का सबसे बड़ा तेल स्टोरेज सेंटर है खार्ग आइलैंड। अब अगर तेल बिकेगा ही नहीं, तो सारा तेल वहीं जमा होता जाएगा। बैसेंट के मुताबिक, कुछ ही दिनों में स्टोरेज फुल हो जाएगा। फिर क्या? मजबूरी में ईरान को अपने तेल कुएं बंद करने पड़ सकते हैं। ये तो सीधा-सीधा बड़ा झटका होगा उनकी इकोनॉमी को।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टेंशन बरकरार
मिडिल ईस्ट में जो असली गेम चल रहा है, वो है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। यही रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से का तेल सप्लाई करता है। अमेरिका अभी भी इस रास्ते पर दबाव बनाए हुए है और ब्लॉकेड हटाने के मूड में नहीं है। मतलब मामला अभी शांत होने वाला नहीं है, भाईसाहब।
जो मदद करेगा, उस पर भी गिरेगी गाज
अब सुन लो सबसे बड़ी बात—अगर कोई देश या कंपनी ईरान की मदद करके तेल बेचने की कोशिश करेगा, तो अमेरिका उसे भी नहीं छोड़ेगा। सीधे-सीधे सैंक्शन ठोक दिए जाएंगे। यानी अब ये गेम सिर्फ ईरान बनाम अमेरिका नहीं रहा, बल्कि जो बीच में आया, वो भी फंस सकता है।
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भारत समेत दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
अब सवाल ये है कि इसका असर हम पर क्या होगा? देखो, अगर मिडिल ईस्ट में टेंशन बढ़ती है तो तेल की कीमतें ऊपर-नीचे होंगी ही। भारत जैसे देश, जो तेल इंपोर्ट करते हैं, उनके लिए ये चिंता की बात है। पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, और महंगाई भी बढ़ सकती है।






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