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Nasal Cancer Symptoms: नाक का कैंसर कैसा दिखता है? जानिए नेजल कैंसर के लक्षण, पहचान और इलाज का पूरा तरीका

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Nasal Cancer Symptoms: नाक से जुड़ी हल्की-फुल्की दिक्कतों को हम अक्सर सर्दी-जुकाम या एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही लक्षण नेजल कैंसर यानी नाक के कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं। नेजल कैंसर एक दुर्लभ बीमारी है, जो नाक की पिछली हिस्से वाली कैविटी या साइनस में होती है। समय पर पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है। आइए देसी और आसान भाषा में समझते हैं इस बीमारी के लक्षण, कारण, बचाव और इलाज।

नेजल कैंसर क्या होता है

नेजल कैंसर को साइनस कैंसर भी कहा जाता है। यह नाक की अंदरूनी कैविटी या साइनस में पनपता है। नाक और साइनस का काम सांस को साफ करना और इंफेक्शन से बचाव करना होता है। जब यहां कैंसर हो जाता है, तो यह धीरे-धीरे सिर, गर्दन और आसपास के हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण आम बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए धोखा हो जाता है।

नेजल कैंसर के शुरुआती लक्षण

इस कैंसर का सबसे आम लक्षण है नाक का एक तरफ से लगातार बंद रहना। नाक से बार-बार खून आना भी खतरे की घंटी हो सकता है। कई बार नाक से गाढ़ा बलगम निकलता है या गले में गिरता महसूस होता है, जिसमें खून भी दिख सकता है। चेहरे में सुन्नपन, दांत हिलना, मुंह खोलने में परेशानी और कानों में दबाव महसूस होना भी इसके संकेत हो सकते हैं।

आंखों और चेहरे पर दिखने वाले संकेत

जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, इसका असर आंखों पर भी पड़ सकता है। दोहरा दिखाई देना, आंखों से लगातार पानी आना, आंखों का बाहर की ओर उभर आना या देखने में दिक्कत होना इसके लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों के चेहरे, नाक या मुंह के ऊपरी हिस्से में गांठ या सूजन भी नजर आती है। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है

धूम्रपान करने वालों में नेजल कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है। HPV वायरस से संक्रमित लोगों को भी इसका रिस्क हो सकता है। इसके अलावा लकड़ी, चमड़ा, कपड़ा उद्योग या ऐसे कारखानों में काम करने वाले लोग, जहां धूल और केमिकल हवा में रहते हैं, उनमें यह बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।

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बचाव और इलाज का देसी तरीका

बचाव के लिए सबसे जरूरी है धूम्रपान छोड़ना। फैक्ट्री या धूल-धुएं वाली जगह पर काम करते समय मास्क जरूर पहनें। HPV से बचाव के लिए सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं। अगर इलाज की बात करें, तो कैंसर की स्टेज के अनुसार डॉक्टर सर्जरी, रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी का सहारा लेते हैं। कई मामलों में कीमो और रेडियोथेरेपी साथ दी जाती है, जिसे केमोरैडिएशन कहा जाता है।

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