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नवीन एसडीएम कोर्ट का निर्माण तेजी से शुरु, सौ वर्ष पुराने भवन को किया जमींदोज

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खबरवाणी

नवीन एसडीएम कोर्ट का निर्माण तेजी से शुरु, सौ वर्ष पुराने भवन को किया जमींदोज

क्रासर

4 हजार स्क्वायर फीट में 1 करोड़ 26 लाख की लागत से होगा तैयार

गंजबसौदा। नवीन एसडीएम भवन के निर्माण के लिए मंजूरी और बजट मिलने के उपरांत कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा निर्माण स्थल पर लगभग सौ वर्ष पुराने जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुके तहसील कक्ष को पंद्रह दिवस पूर्व जेसीबी की मदद से तोड़ा गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 करोड़ 26 लाख की लागत से तहसील परिसर में 4000 स्क्वायर फीट में एसडीएम कोर्ट का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वर्तमान में एसडीएम कोर्ट ग्वालियर स्टेट के समय निर्मित पुरानी तहसील भवन में संचालित हो रहा है। यह भवन अलंग पत्थरों से बना है और करीब सौ वर्ष पूर्ण हो चुके है वर्ष 1980 तक यहां तहसीलदार कार्यालय संचालित होता था।इसके बाद एसडीएम पद स्थापित होने पर इसे अनुविभागीय कार्यालय के रूप में उपयोग किया जाने लगा लेकिन यह भवन भी जर्जर हालत में होने से नवीन भवन की मांग लंबे समय से चल रही थी। इसी के बाजू में महिला एवं बाल विकास भवन भी वर्ष 2008 में शिफ्ट किया गया है। भविष्य में इसको भी अन्य जगह शिफ्ट करने की योजना है क्योंकि यह भवन भी धीरे-धीरे रखरखाव के अभाव में जर्जर होने लगा है।

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आधुनिकता से परिपूर्ण होगा नवीन एसडीएम कोर्ट

एसडीएम कोर्ट परिसर में 4000 स्क्वायर फीट में आधुनिक भवन तैयार किया जाएगा। जिसमें कंप्यूटर सुविधा के साथ ही आनलाइन मीटिंग की व्यवस्था भी रहेगी। इसके साथ मीटिंग हाल और कंप्यूटर कक्षों का निर्माण भी किया जा रहा है। करीब तीन सप्ताह पूर्व निर्माण एजेंसी एमएस कंस्ट्रक्शन द्वारा भवन का ले-आउट डाला गया था। एसडीएम कोर्ट के साथ अलग कंप्यूटर कक्ष बनाए जाएंगे इसके अलावा एक मीटिंग हाल से अटैच कान्फ्रेंस हाल भी बनाया जाएगा, जिसका उपयोग वीसी के लिए किया जाएगा। मालूम हो कि पहले एसडीएम कोर्ट का निर्माण पुराने न्यायालय परिसर से लगकर किया जा रहा था। लेकिन हाई कोर्ट ने इसकी स्वीकृति नहीं दी इसलिए डिजाइन बदलकर एसडीएम भवन का स्थान बदला गया इसलिए निर्माण शुरू होने में विलंब हुआ।

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जर्जर हो रहा पुराना भवन

करीब सौ वर्ष पुराना तहसील प्रांगण में बना एसडीएम कोर्ट का भवन जर्जर हो रहा है। वर्षाकाल में यहां पानी तक टपकता है। हर वर्ष मरम्मत के बाद भी इसकी छत और दीवारें कमजोर हो गई है। पत्थर की पुरानी निर्माण तकनीकी के चलते मरम्मत के कारीगर भी उपलब्ध नहीं है। जिससे इस भवन को संरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है। विभागीय बैठक और न्यायिक कार्रवाई के दौरान भी जगह की भारी कमी महसूस की जा रही थी। मीटिंग से लेकर अन्य कार्य के लिए एक दर्जन से अधिक लोग एसडीएम कक्षा में नहीं बैठ पाते थे। कोर्ट पेशी से लेकर कॉन्फ्रेंस के लिए भी यहां पर्याप्त जगह नहीं है। वीडियो कांफ्रेंस के लिए पटवारी सभा कक्ष के बाजू में बने कक्षों का उपयोग किया जाता है।जिससे काफी समय खराब होता है अब नवीन भवन में ही यह सारी सुविधाएं उपलब्ध होने से कार्य करने में आसानी होगी। एमएस कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राहुल ठाकुर ने बताया कि 4000 वर्ग फीट में नवीन तकनीक के अनुसार इस भवन का निर्माण शुरू किया गया है।

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