What is Form 17C explained:दोस्तों, बिहार चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के दौरान Election Commission ने एक अहम दस्तावेज़ का ज़िक्र किया – Form 17C। इसे चुनाव आयोग की भाषा में Account of Votes Recorded कहा जाता है। यह फॉर्म हर पोलिंग बूथ पर मतदान खत्म होने के बाद Presiding Officer द्वारा भरा जाता है। इसमें उस दिन हुए वोटिंग का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होता है।
Form 17C में क्या दर्ज किया जाता है?
इस फॉर्म में कई ज़रूरी जानकारियाँ लिखी जाती हैं, जैसे:
- पोलिंग स्टेशन का नाम और नंबर
- EVM मशीन का सीरियल नंबर
- कुल मतदाता संख्या
- डाले गए वोटों की संख्या
- वैध और अवैध वोटों का हिसाब
- इस्तेमाल न हुए मतपत्र
- NOTA को मिले वोट
- VVPAT मशीन से संबंधित डाटा
क्यों ज़रूरी है Form 17C वोट गिनती में?
चुनाव में वोटों की गिनती के समय Form 17C सबसे अहम आधार बनता है।
- जब EVM से वोट गिने जाते हैं, तो उसमें दर्ज वोटों की संख्या को Form 17C से क्रॉस-चेक किया जाता है।
- किसी भी गड़बड़ी या विवाद की स्थिति में यह फॉर्म कानूनी सबूत की तरह इस्तेमाल होता है।
- चूँकि इस पर पार्टी एजेंट्स के साइन भी होते हैं, यह पूरे चुनावी प्रोसेस में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखता है।
उम्मीदवारों और एजेंट्स को मिलती है कॉपी
मतदान खत्म होने के बाद, Form 17C की एक कॉपी उम्मीदवारों या उनके एजेंट्स को दी जाती है और दूसरी कॉपी गिनती केंद्र भेजी जाती है। इससे सभी पक्षों को भरोसा रहता है कि EVM में दर्ज वोट और मैदान में पड़े वोटों का हिसाब बिल्कुल सही है। यही वजह है कि इसे चुनाव का Audit Paper भी कहा जाता है।
चुनाव आयोग का नियम और पाबंदी
चुनाव आयोग के हलफ़नामे के मुताबिक, Form 17C को उम्मीदवारों और एजेंट्स को देना ज़रूरी है, लेकिन इसे आम जनता के लिए सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसे पब्लिक करने से भ्रम या गलतफ़हमियाँ फैल सकती हैं और डाटा से छेड़छाड़ की आशंका भी बढ़ जाती है।





