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भाद्रपद माह में करें यह छोटा सा उपाय, तुलसी की लकड़ी का दीया जलाने से खुलेंगे धन के दरवाजे, दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा

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भाद्रपद माह अपने आप में बेहद खास माना जाता है. इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के कई सरल और असरदार उपाय बताए गए हैं. खासकर अगर घर में पैसों की कमी हो, कर्ज बढ़ रहा हो या आर्थिक हालात ठीक न हों, तो इस महीने में एक खास उपाय करने से आपकी किस्मत बदल सकती है. ज्योतिष मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह में तुलसी की सूखी लकड़ी का दीया जलाना बेहद शुभ माना जाता है. यह सिर्फ पैसों की समस्या ही नहीं, बल्कि घर की नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करता है. माना जाता है कि इस छोटे से उपाय से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, कर्ज कम होता है और राहु-केतु जैसे ग्रहों का दुष्प्रभाव भी मिटता है.

क्यों खास है भाद्रपद माह?
भाद्रपद माह भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना है. इसी महीने में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है और मान्यता है कि इसी समय राधा रानी से उनका ब्रह्म विवाह हुआ था. इस वजह से यह महीना प्रेम, भक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस समय किए गए शुभ काम और पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है.
किस लकड़ी का दीया जलाएं?
इस महीने में तुलसी की सूखी लकड़ी का दीया जलाना सबसे शुभ माना गया है, अगर घर में गणेश जी की पूजा होती है तो तुलसी के स्थान पर दूर्वा घास का दीया जलाना बेहतर है, क्योंकि गणेश पूजन में तुलसी वर्जित होती है. तुलसी की सूखी लकड़ी से जलने वाला दीया सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक तरह से घर के वातावरण को भी पवित्र करता है.

तुलसी की सूखी लकड़ी का दीया जलाने के फायदे
1. माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन का आगमन होता है.
2. पैसों से जुड़ी दिक्कतें और कर्ज कम होने लगते हैं.
3. घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक माहौल बनता है.
4. ग्रह दोष, खासकर राहु-केतु का असर कम होता है.
5. घर का वास्तु संतुलित होता है और पारिवारिक शांति बनी रहती है.

दीया जलाने की सही विधि
1. एक साफ मिट्टी का दीया लें.
2. इसमें घी डालें, घी न हो तो सरसों का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
3. तुलसी के पौधे से सूखी लकड़ी का छोटा टुकड़ा लें (ध्यान रखें, कोई हरी पत्ती न हो).
4. दीये में रुई की बाती रखें और उसके साथ तुलसी की सूखी लकड़ी का टुकड़ा भी रखें.
5. शाम के समय दीया जलाएं और तुलसी के पौधे के पास रखें.
6. दीया जलाते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें.
7. चाहें तो तुलसी चालीसा या तुलसी स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं.
8. दीया कभी जमीन पर न रखें, इसे थाली या ऊंचे स्थान पर रखें.

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