Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

पंखे की हवा में अमानक से मानक हो गई 2200 बोरी मूंग रानीपुर मूंग खरीदी घोटाला: अधिकारियों की मिलीभगत पर उठ रहे सवाल…]

By
On:

पंखे की हवा में अमानक से मानक हो गई 2200 बोरी मूंग
रानीपुर मूंग खरीदी घोटाला: अधिकारियों की मिलीभगत पर उठ रहे सवाल…]
सांध्य दैनिक खबरवाणी, घोड़ाडोंगरी
जिले में खरीदी गई मूंग को लेकर बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। 6 अगस्त को रानीपुर वेयरहाउस में तत्कालीन डीएमओ राधेश्याम निगम ने 2200 बोरी मूंग को अमानक घोषित कर दिया था जिसे अपग्रेड करने का आदेश दिया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद यही मूंग मानक बना दी गई। अब पूरे मामले में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ पंखा चलाकर 2200 बोरी की कंकड़ पत्थर गली अमानक मूंग को अपग्रेड कर मानक घोषित करना संभव है, या फिर यह सब भ्रष्टाचार का खेल है? गौरतलब है कि इस मामले को यदि खरीदी के समय ही सख्ती से देखा जाता तो हालात ये नहीं होते।
30 दिन तक छुपाई गई जानकारी
तत्कालीन डीएमओ निगम ने जानकारी मीडिया से छुपाई, फोन तक उठाना बंद कर दिया था। उनके स्थानांतरण के बाद नए डीएमओ प्रदीप ग्रेवाल ने पदभार तो संभाला, लेकिन 15 दिन तक हर बार आश्वासन देकर टालते रहे। जब दबाव बढ़ा तो उन्होंने कहा -‘मूंग अपग्रेड मेरे आने से पहले हो चुका था, लेकिन मेरे पास पंचनामा तक नहीं आया है। मैं जानकारी बुला रहा हूं क्या-क्या हुआ है फिर बताता हूं’ यानी, न सबूत है और न ही स्पष्ट जवाब।
पूर्व और वर्तमान डीएमओ आमने-सामने
एक कह रहा है काम हो गया, दूसरा कह रहा है सबूत नहीं मिला। इससे संदेह और गहराता है। यानी 2200 बोरी मूंग के मामले में कहीं न कहीं बड़े भ्रष्टाचार की गंध तो आ रही है, लेकिन हर स्तर पर मामला दबाने का काम किया जा रहा है।
समिति प्रबंधक का बयान
रानीपुर समिति प्रबंधक परसराम वर्मा ने बताया कि अमानक बताने के 3-4 दिन बाद मूंग को पंखा लगाकर अपग्रेड कर दिया गया। उनका दावा है कि -2200 बोरियों में सिर्फ 3-4 कट्टे ही अमानक थे। बाकी अनाज को मानक मान लिया गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर शुरुआत से ही सिर्फ 3-4 कट्टे अमानक थे, तो फिर 2200 बोरी को अमानक घोषित क्यों किया गया? और फिर इतनी जल्दी अपग्रेड कैसे हो गई?
किसानों में रोष
इस घोटाले से किसानों में भारी नाराजग़ी है। किसान संगठनों का कहना है कि -यह पूरा खेल अधिकारियों और समिति प्रबंधकों की मिलीभगत से हुआ है। अगर 2200 बोरी अमानक को कुछ ही दिनों में मानक बनाया जा सकता है, तो यह प्रक्रिया पहले क्यों नहीं अपनाई गई? सरकार किसानों को पारदर्शिता का भरोसा देती है, लेकिन अंदरखाने घोटाले हो रहे हैं। किसान ने यह सब जानकारी नाम नहीं छापने पर बताई है क्योंकि नाम छापने के बाद में यह लोग किसानों को भी परेशान कर देते हैं
अब तक की स्थिति
अमानक बोरी के स्टेज की फोटो और वीडियो मीडिया के पास मौजूद है जिसमें एक एक बोरी की स्थिति बारीकी से पहचान आ सकती है। इसी कारण से अब अफसर जानकारी देने से बच रहे हैं। ओर जांच के नाम पर फाइलें इधर-उधर घुमा रहे हैं। वेयरहाउस निरीक्षण पर भी टालमटोल किया जा रहा है।
उठ रहे हैं सवाल ?
> 2200 बोरी मूंग अमानक थी या मानक, सच क्या है ?
> अगर अपग्रेड हो चुका था तो 20 दिन तक यह जानकारी क्यों दबाई गई ?
> क्या यह घोटाला बड़े अधिकारियों की शह पर हुआ ?
> लाखों का अनाज भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा या किसानों के साथ धोखा हुआ ?
यह मामला अब बैतूल जिले में एक बड़े घोटाले की शक्ल ले चुका है। अधिकारियों के विरोधाभासी बयान, समिति का दबाव और जानकारी छुपाने की कोशिशें यह साबित करती हैं कि कहीं न कहीं मिलीभगत ज़रूर है। किसान संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। गौरतब है कि रानीपुर खरीदी केंद्र पर खरीदी शुरू होते ही यह अमानक मूंग का मामला जोरशोर से उठा था।
इनका कहना है
अपग्रेड का काम मेरे कार्यकाल में ही हो चुका था, मैंने पंचनामा भी बनाया था।
राधेश्याम निगम, (पूर्व डीएमओ, अब गुना में पदस्थ)
इनका कहना है
पंचनामा अब तक मेरे पास नहीं है। खरीदी अब बंद हो चुकी है उपार्जन समिति मैं बात रखने के बाद ही निरीक्षण का निर्णय संभव है।
प्रदीप ग्रेवाल (वर्तमान डीएमओ)

For Feedback - feedback@example.com

Related News

Leave a Comment

Home Icon Home E-Paper Icon E-Paper Facebook Icon Facebook Google News Icon Google News