मध्यप्रदेश शासन के अंतर्गत जारी एक आय प्रमाण-पत्र ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। ग्राम घाना, तहसील मुलताई, जिला बैतूल निवासी के नाम जारी इस प्रमाण-पत्र में परिवार की सालाना आय मात्र ₹2 (दो रुपये) दर्शाई गई है।
यह प्रमाण-पत्र नायब तहसीलदार पट्टन द्वारा जारी किया गया है और इसमें साफ लिखा है कि दस्तावेज़ आवेदक द्वारा प्रस्तुत घोषणा-पत्र के आधार पर बनाया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि—क्या प्रशासन बिना जांच-पड़ताल के ₹2 सालाना आय जैसे अविश्वसनीय आंकड़े पर मुहर लगा रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में ₹2 सालाना आय न सिर्फ असंभव है, बल्कि यह आय प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर सीधा तमाचा है। ऐसे प्रमाण-पत्र अगर मान्य हो रहे हैं, तो सरकारी योजनाओं की पात्रता का क्या अर्थ रह जाता है?
जनता पूछ रही है—
क्या यह मानवीय भूल है या सिस्टम की गंभीर लापरवाही?
क्या ऐसे प्रमाण-पत्रों का उपयोग सरकारी योजनाओं का गलत लाभ लेने में किया जाएगा?
यदि आय गलत है, तो जिम्मेदारी किसकी—आवेदक की या प्रमाण-पत्र जारी करने वाले तंत्र की?
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। अगर ₹2 सालाना आय जैसे प्रमाण-पत्र भी जांच के बिना जारी होंगे, तो असली जरूरतमंद कहां जाएंगे?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर तुरंत सुधार और जांच करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा।
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