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आरटीआई कार्यकर्ताओं के अधिकारों पर डाका अशोकनगर मंडी में सूचना के अधिकार की धज्जियां उड़ा रहे मंडी सचिव प्रेमकुमार मीणा
पूर्व सचिव के काले कारनामों पर पर्दा डालने का खेल, अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज पर काम कर रहे वर्तमान मंडी सचिव
अशोकनगर। पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए लागू किया गया सूचना का अधिकार कानून अशोकनगर कृषि उपज मंडी में केवल एक कागजी खिलौना बनकर रह गया है। मंडी प्रशासन की तानाशाही और मनमानी का आलम यह है कि यहां बैठे अधिकारी खुलेआम आरटीआई अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नवीन कृषि उपज मंडी में प्लाटिंग, बोर्ड और दुकानों के आवंटन में हुए कथित झोलझाल और अनियमिताओं को उजागर करने के लिए जब आरटीआई कार्यकर्ता राहुल जैन ने जानकारी मांगी, तो वर्तमान मंडी सचिव प्रेमकुमार मीणा ने कानून को ताक पर रखते हुए न केवल आवेदन को खारिज कर दिया, बल्कि गुमराह करने का नया पैंतरा भी अपना लिया। आवेदक राहुल जैन ने नवीन मंडी परिसर में दुकानों और प्लाटिंग आवंटन प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे थे।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर मंडी प्रशासन को किस बात का डर है आरटीआई आवेदन खारिज करने के बाद जब आवेदक ने मंडी सचिव से संपर्क किया, तो सचिव प्रेमकुमार मीणा ने बड़ी बेशर्मी से यह आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया कि जवाबी पत्रक डाक द्वारा आपके पते पर भिजवा दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बात को पूरा एक महीना बीत चुका है, लेकिन राहुल जैन के पते पर अब तक कोई सरकारी पत्र या डाक नहीं पहुंची है। सवाल उठता है कि क्या मंडी सचिव का यह जवाब केवल आवेदक को टहलाने और मामले को ठंडा करने की सोची-समझी साजिश थी ‘डाक से भेजने’ की बात महज एक सफेद झूठ और मनगढ़ंत बहाना था ताकि जानकारी मांगने वाले का मनोबल तोड़ा जा सके। जब सूचना के अधिकार अधिनियम में गड़बड़ी और मंडी सचिव प्रेम कुमार मीणा के अड़ियल रवैये को लेकर पक्ष जाना तो भार साधक अधिकारी इसरार खान ने फोन रिसीव करना भी मुनासिब नहीं समझा।
गौरतलब है कि राहुल जैन द्वारा मांगी गई जानकारी पूर्व मंडी सचिव भागीरथ अहिरवार के कार्यकाल के दौरान हुए आवंटन और फैसलों से संबंधित है। भागीरथ अहिरवार के कार्यकाल में दुकानों के आवंटन और प्लाटिंग में बड़े पैमाने पर धांधली और चहेतों को रेवड़ियां बांटने के आरोप लगातार उठते रहे हैं। अब जब वर्तमान मंडी सचिव प्रेमकुमार मीणा उन फाइलों को दबाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं, तो जनमानस में यह सवाल कौंधना स्वाभाविक है: क्या वर्तमान मंडी सचिव पूर्व सचिव की चाटुकारिता में लगे हैं, या फिर इस बहती गंगा में हाथ धोने का सिलसिला अब भी जारी है अधिकारियों की यह कार्यप्रणाली इशारा करती है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। पूर्व अधिकारी के कारनामों पर पर्दा डालना और कानून की धज्जियां उड़ाकर आरटीआई आवेदनों को कचरे के डिब्बे में फेंकना इस बात का पुख्ता सबूत है कि मंडी प्रशासन के अंदर गहरे भ्रष्टाचार की जड़ें जमी हुई हैं। यदि आवंटन प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी, तो फिर दस्तावेज सार्वजनिक करने में इतनी घबराहट क्यों पारदर्शिता से यह भागमभाग खुद-ब-खुद अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करती है।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और कृषि विपणन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी अशोकनगर मंडी में चल रहे इस ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाले खेल पर संज्ञान लेते हैं या फिर भ्रष्ट तंत्र को इसी तरह संरक्षण मिलता रहेगा।





