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बाईक भिड़ंत में दो युवकों की दर्दनाक मौत, उपचार में देरी पर अस्पताल में हंगामा

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खबरवाणी

बाईक भिड़ंत में दो युवकों की दर्दनाक मौत, उपचार में देरी पर अस्पताल में हंगामा

भैंसदेही
जिले के भैंसदेही झल्लार मार्ग पर वाघमारे के खेत के समीप शनिवार देर शाम दो बाईकों की आमने-सामने भिड़ंत में दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भैंसदेही में समय पर उपचार नहीं मिलने के आरोपों को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया तथा अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ दोनों शवों को मुख्य मार्ग पर रख जोरदार प्रदर्शन किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस भीषण दुर्घटना में पोहर निवासी 40 वर्षीय जगदीश पिता गणपति अड़लक की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल 22 वर्षीय अंकुश पिता धनराज वाघमारे को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भैंसदेही लाया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर डॉक्टर की गैर मौजूदगी और उचित उपचार नहीं मिलने के कारण अंकुश ने भी दम तोड़ दिया।
दुर्घटना में भूपेन्द्र पिता धर्मराज वाघमारे निवासी मालेगांव एवं सुनिता जगदीश अड़लक निवासी पोहर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें बैतूल जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि रेफर मरीजों को जिला अस्पताल पहुंचाने के लिए लंबे समय तक एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके चलते दोनों घायलों को निजी वाहन से बैतूल ले जाना पड़ा।
घटना से आक्रोशित परिजनों, ग्रामीणों एवं नगरवासियों ने अस्पताल परिसर के बाहर दोनों शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया और डॉक्टरों व स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम मरावी, एसडीओपी, थाना प्रभारी सहित कुछ समय पश्चात जिला चिकित्सा अधिकारी हुरमाड़े मौके पर पहुंचे। अधिकारियों द्वारा समझाइश देने के बाद परिजन शांत हुए और शवों को अस्पताल परिसर में शिफ्ट किया गया। देर रात होने के कारण पोस्टमार्टम नहीं हो सका, जिसके चलते रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की बात कही गई।
अधिकारियों के बयान
एसडीएम मरावी ने कहा कि,
“घटना अत्यंत दुखद है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जाएंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं जिला स्वास्थ्य अधिकारी हुरमाड़े ने कहा कि,
“घटना की जानकारी मिलते ही मैं तत्काल अस्पताल पहुंचा हूं। पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी तथा दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

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घटना के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए। जानकारी के अनुसार काफी मान मनवल के बाद जब शव रखने की बारी आई तब अजीब नजारा देखने मे आया स्वयं जिला अधिकारी को शव को रखवाने ले लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। हॉस्पिटल मे नहीं उपलब्ध नहीं था मर्चेंरी बॉक्स नगर परिषद के पास केवल एक आइस बॉक्स उपलब्ध था, जबकि शव दो थे अस्पताल का एकमात्र एसी रूम बंद मिला। बताया गया कि अधिकारी स्वयं स्विच बोर्ड चालू करने का प्रयास करते रहे, लेकिन एसी चालू नहीं हो सका। बाद में शवों को ठंडक देने के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था करनी पड़ी।
घटना के दौरान अस्पताल में कई अन्य अव्यवस्थाएं भी सामने आईं। आरोप लगाए गए कि ड्यूटी शेड्यूल बोर्ड पर अब तक पिछले माह की ड्यूटी सूची ही लगी हुई थी। वहीं खाली ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए जाने जैसे गंभीर आरोप भी चर्चा में रहे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण मरीजों को मजबूरी में महाराष्ट्र के परतवाड़ा और अमरावती जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। सांप काटने अथवा कुत्ते के काटने जैसी आपात स्थितियों में भी पर्याप्त दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं।
हालांकि प्रशासन ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित कर लिया, लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि पूरे मामले में दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था में कितना सुधार हो पाता है

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