खबरवाणी
शिक्षा का काला कारोबार दो कमरों के मकानों में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे प्राइवेट स्कूल……
बिना मान्यता और सुविधाओं के गली-मोहल्लों में फर्जी प्राइवेट स्कूल,अधिकारियों की ‘छत्रछाया’ और संदेह के घेरे में शिक्षा विभाग…..
अशोकनगर। जिले में शिक्षा का अधिकार और मध्य प्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए निजी स्कूलों का काला कारोबार चरम पर है। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय से लेकर कस्बों और ग्रामीण अंचलों तक, गली-मोहल्लों में दो-दो कमरों के मकानों में गैर-कानूनी तरीके से प्राइवेट स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इस पूरे खेल को शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है। अधिकारियों की इसी ‘छत्रछाया’ के कारण शिक्षा माफिया बेखौफ होकर अपनी जेबें भर रहे हैं और बच्चों के भविष्य खिलवाड़ किया जा रहा है।
अशोकनगर के विभिन्न वार्डों और तंग गलियों में झांककर देखें तो समझ आता है कि शिक्षा किस तरह एक विशुद्ध व्यापार बन चुकी है। न खेल का मैदान, न स्वच्छ पेयजल, न अग्निशमन यंत्र और न ही हवादार कमरे इसके बावजूद इन कथित स्कूलों में सैकड़ों बच्चों का प्रवेश ले लिया जाता है। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी विद्यालय को मान्यता देने से पहले भूमि का क्षेत्रफल, भवन की सुरक्षा, शिक्षकों की योग्यता, अग्निशमन एनओसी और खेल के मैदान जैसे मानकों की कड़ी जांच होना अनिवार्य है। लेकिन अशोकनगर में इन तमाम नियमों को ताक पर रखकर कागजों में सब “ऑल ओके” दिखा दिया जाता है। जमीनी हकीकत यह है कि एक ही मान्यता पर दो से तीन अलग-अलग स्थानों पर शाखाएं चलाई जा रही हैं। प्राइवेट स्कूलों की लूट केवल फीस तक सीमित नहीं है। सत्र शुरू होते ही अभिभावकों पर विशेष दुकानों से ही महंगे दामों पर किताबें, कापियां और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाता है। स्कूल संचालकों और बुक सेलर्स के बीच तय कमिशन के खेल में आम अभिभावक पिस रहा है। जो किताबें बाजार में सामान्य दरों पर मिल सकती हैं, उन्हें विशेष पब्लिशर्स का बताकर 3 से 4 गुना अधिक कीमतों पर बेचा जाता है।हर साल ‘विकास शुल्क’, ‘एनुअल चार्ज’ और री-एडमिशन के नाम पर मनमानी राशि वसूली जाती है। आपत्ति जताने वाले अभिभावकों को बच्चों को स्कूल से निकालने या टीसी देने की धमकी दी जाती है।
इस पूरे मामले में सर्व शिक्षा अभियान और जिला शिक्षा केंद्र के प्रमुख की कार्यप्रणाली सबसे ज्यादा संदेह के घेरे में है। सत्र की शुरुआत में निरीक्षण के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। जिन अवैध स्कूलों पर कार्रवाई होनी चाहिए, उन्हें नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। या फिर निरीक्षण भी नहीं किया जाता हैं। साल दर्जनों ऐसे स्कूलों की मान्यता नवीनीकृत कर दी जाती है, जो बुनियादी मापदंडों पर शून्य हैं। तंग गलियों में बिना इमरजेंसी एग्जिट के चल रहे ये स्कूल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। बहुमंजिला मकानों में बिना सुरक्षा उपायों के बच्चों को बैठाया जाता है। यदि कोई अप्रिय घटना या आगजनी जैसी स्थिति बनती है, तो वहां से बच्चों का सकुशल निकलना लगभग असंभव है। इसके बावजूद, जिला प्रशासन का आपदा प्रबंधन और शिक्षा विभाग इस गंभीर खतरे की ओर से आंखें मूंदे बैठा है। अब देखना यह होगा कि अशोकनगर जिला प्रशासन इस शिक्षा माफिया और विभाग की साठगांठ पर कब तक नकेल कस पाता है, या फिर अधिकारियों की इसी ‘छत्रछाया’ में गली-मोहल्लों का यह काला धंधा यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
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खबर 2
नेशनल लोक अदालत की सफलता के लिए अधिवक्ताओं के साथ बैठक आयोजित
अशोकनगर। आगामी 12 सितम्बर को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत को सफल बनाने के उद्देश्य से जिला न्यायालय परिसर स्थित अभिभाषक कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अशोकनगर के अध्यक्ष तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सतीश चन्द्र शर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
बैठक में आगामी लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक लंबित प्रकरणों के सौहार्दपूर्ण और शीघ्र निराकरण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अध्यक्षता कर रहे सतीश चन्द्र शर्मा ने वकीलों को सूचित किया कि पुराने बिजली विभाग से संबंधित मामलों को सफलता पूर्वक निराकृत कर लिया गया है। उन्होंने उपस्थित अधिवक्ताओं से अपील की कि वे अपने पक्षकारों को आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर मामलों को निपटाने के लिए प्रेरित करें, ताकि विवादों का स्थाई समाधान हो सके। बैठक के दौरान जिला अधिवक्ता संघ द्वारा कुछ व्यावहारिक समस्याओं को रेखांकित किया गया, जिनका मौके पर ही नोडल ऑफिसर एवं जिला न्यायाधीश सुनील कुमार कौशिक द्वारा निराकरण कर दिया गया। वहीं, प्राधिकरण के सचिव मनीष अनुरागी ने वकीलों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आमजन को लोक अदालत का लाभ पहुँचाने का अनुरोध किया। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार गठित खंडपीठों के सदस्यों से आग्रह किया गया कि वे पूरे दिन उपस्थित रहकर पक्षकारों को सुलभ न्याय दिलाने में सहयोग करें।
इस बैठक में जिला न्यायाधीश सुनील कुमार कौशिक, सचिव मनीष अनुरागी, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर साहू, सचिव रामनिवास शर्मा, जिला विधिक सहायता अधिकारी हेमंत कुशवाहा, कार्यकारिणी सदस्य राहुल मिश्रा, उमेश यादव सहित वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उपस्थित सभी अधिवक्ताओं ने नेशनल लोक अदालत को सफल बनाने और अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण में अपना पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
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खबर 3
गैस सप्लाई में अनियमितता और कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई, डीसी गैस एजेंसी का गोदाम सील…
अशोकनगर। जिले में गैस रिफिल सप्लाई में लगातार मिल रही शिकायतों और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सेल्स ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने डीसी गैस एजेंसी पर शिकंजा कसा है। एजेंसी संचालन में बड़े पैमाने पर जारी गड़बड़ियों के बाद कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने गोदाम को सील कर दिया है।
दरअसल, एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं को समय पर गैस रिफिल न देना,वितरण में देरी और अनियमितता की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई में भी दर्जनों आवेदन प्राप्त हुए थे। जब आइओसीएल सेल्स ऑफिसर ने एजेंसी की जांच की, तो शुरुआती तौर पर स्टॉक का मिलान सही नहीं पाया गया और रिफिल प्रदाय में गंभीर लापरवाही सामने आई।
शिकायतों की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर अशोकनगर के सख्त निर्देश पर राजस्व एवं खाद्य विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई की। टीम ने एजेंसी के गोदाम पर छापामार कार्रवाई करते हुए भौतिक सत्यापन किया और अनियमितताएं सही पाए जाने पर गोदाम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। उपभोक्ताओं के अधिकारों से खिलवाड़ और कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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