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रंग-बिरंगी कुल्फी-पेप्सी का कारोबार: बच्चों की सेहत से खिलवाड़ या विभागीय लापरवाही
बुरहानपुर। गर्मी के मौसम में गली-मोहल्लों में रंग-बिरंगी कुल्फी, पेप्सी बर्फ और विभिन्न प्रकार की ठंडी खाद्य सामग्री बेचने वालों की संख्या बढ़ जाती है। इन उत्पादों को विशेष रूप से छोटे बच्चे आकर्षित होकर खरीदते हैं, लेकिन खुले वातावरण में तैयार और बेची जा रही कुल्फी-पेप्सी की गुणवत्ता को लेकर नागरिकों में चिंता बढ़ रही है।
लोगों का कहना है खुलेआम बिक रही कुल्फी और पेप्सी बर्फ में अत्यधिक रंगों का उपयोग दिखाई देता है। कई उपभोक्ताओं ने स्वाद में बदलाव और कड़वाहट जैसी शिकायतें भी व्यक्त की हैं। हालांकि इन शिकायतों की पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा जांच के बाद ही की जा सकती है, लेकिन ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
बच्चों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य पदार्थों के निर्माण और भंडारण में स्वच्छता का विशेष महत्व होता है। यदि किसी खाद्य सामग्री को अस्वच्छ वातावरण में तैयार किया जाए या अनुचित तरीके से रखा जाए, तो उसके सेवन से पेट संबंधी समस्याएं, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
गर्मी, धूप, धूल और बदलते मौसम के बीच खुले में बेची जा रही कुल्फी-पेप्सी को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। नागरिकों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए नियमित जांच और निगरानी आवश्यक है।
सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कुल्फी-पेप्सी बेचने वाले फेरीवालों और निर्माण इकाइयों की गतिविधियां आसानी से देखी जा सकती हैं। ऐसे में नागरिक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या संबंधित विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है या नहीं। लोगों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जांच अभियान चलाए जाने चाहिए।
नियम क्या कहते हैं?
खाद्य पदार्थों का निर्माण, भंडारण और विक्रय निर्धारित मानकों एवं स्वच्छता नियमों के अनुरूप होना चाहिए। खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में संबंधित विभाग को निरीक्षण, नमूना जांच और आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार होता है। यदि किसी उत्पाद में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अभिभावकों ने की जांच की मांग
कई अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि शहर में संचालित कुल्फी-पेप्सी निर्माण इकाइयों तथा बिक्री केंद्रों की व्यापक जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों को बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थ गुणवत्ता और स्वच्छता के निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हों।
प्रमुख सवाल
क्या कुल्फी-पेप्सी निर्माण इकाइयों का नियमित निरीक्षण हो रहा है?
उपयोग किए जा रहे रंग और सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं?
खुले में बिक रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच कब होगी?
बच्चों की सेहत से जुड़े इस मुद्दे पर संबंधित विभाग क्या कदम उठाएगा?





