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बीमा का फायदा उठाकर अस्पताल बना रहे फर्जी बिल? सरकार सख्ती के मूड में

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भारत सरकार स्वास्थ्य बीमा दावों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बढ़ती लागत पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की योजना बना रही है। सरकार की योजना है कि मौजूदा नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज पोर्टल को वित्त मंत्रालय और बीमा नियामक संस्था IRDAI (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) के अधीन लाया जाए। बता दें कि अभी यह पोर्टल स्वास्थ्य मंत्रालय की National Health Authority के अंतर्गत आता है।

अस्पतालों में बीमा कवरेज वाले मरीजों से अधिक पैसे लिए जा रहे हैं

समाचार एजेंसी रॉयटर्स पर सरकारी सूत्रों के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, बीमा नियामक संस्था और सरकार ने कई विश्लेषण किए हैं। इसमें यह पाया गया है कि कई निजी अस्पताल बीमा कराने वाले मरीजों से अत्यधिक पैसा वसूल रहे हैं। जिन मरीजों के पास लाखों या करोड़ों रुपये के बीमा कवरेज हैं, उनसे और अधिक पैसे लिए जा रहे हैं। इसका सीधा असर बीमा कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है। इस कारण कंपनियां प्रीमियम की दरें बढ़ा रही हैं। इससे कई लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा लेना महंगा या लगभग असंभव हो गया है।

सरकार अब नकेल कसने की कवायद कर रही है

इस रिपोर्ट में एक ग्लोबल मेडिकल ट्रेंड का भी जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक, भारत में स्वास्थ्य सेवा की लागत 2025 में 13% तक बढ़ने का अनुमान है, जो वैश्विक औसत 10 फीसदी से अधिक है। अस्पतालों की लागत 2024 में दर्ज की गई 12 फीसदी से भी अधिक पाई गई है, जिसके बाद केंद्र सरकार अब नकेल कसने की कवायद कर रही है।

बीमा प्रीमियम की बढ़ती लागत चिंताजनक

खबर के मुताबिक सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि देश में स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम से होने वाली वार्षिक आय भी कम हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में वृद्धि दर घटकर 9% रह गई है, जबकि पहले यह 20 फीसदी से अधिक थी। बीमा प्रीमियम की बढ़ती लागत के कारण लोग अपनी पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं करा पा रहे हैं।

बीमा के दावों से जुड़े पोर्टल की निगरानी वित्त मंत्रालय और बीमा नियामक के अधीन

तमाम पहलुओं के विश्लेषण के बाद सरकार का मानना है कि अगर बीमा के दावों से जुड़े पोर्टल की निगरानी वित्त मंत्रालय और बीमा नियामक के अधीन लाई जाती है, तो बीमा कंपनियां मिलकर अस्पतालों के साथ दरें तय करने में सक्षम होंगी। इससे अनावश्यक खर्च और ओवरचार्जिंग पर नकेल कसी जा सकेगी। सरकार का मकसद स्वास्थ्य बीमा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुलभ और किफायती बनाना है।

भारत सरकार की तरफ से आधिकारिक बयान का इंतजार

यह भी दिलचस्प है कि स्वास्थ्य और वित्त मंत्रालयों की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, अगर सरकार यह पहल करती है तो देश में आसमान छूते जा रही अस्पताल के खर्चों और स्वास्थ्य लागत पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही बीमा के गिरते कवरेज को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

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