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पशुपालन विभाग में पसरा सन्नाटा, कक्षों में लटके ताले, भटक रहे पशुपालक
अशोकनगर। जिला मुख्यालय स्थित पशुपालन विभाग के कार्यालय में इन दिनों अजब ही नजारा देखने को मिल रहा है। कार्यदिवस होने के बावजूद कार्यालय के अधिकांश कक्षों में ताले लटके नजर आ रहे हैं और अधिकारी व कर्मचारी अपनी ड्यूटी से नदारद हैं। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से अपनी समस्याओं के समाधान और योजनाओं की जानकारी लेने पहुँच रहे पशुपालक घंटों इंतजार करने के बाद निराश होकर लौटने को मजबूर हैं।
विभाग में कर्मचारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि समय पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अपनी सीट पर नहीं मिलता। पशुओं के टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, और शासन द्वारा संचालित अनुदान योजनाओं के आवेदन जमा करने आए ग्रामीणों को हर दिन खाली हाथ वापस जाना पड़ रहा है। बीमार पशुओं के इलाज से जुड़ी सलाह या दवाइयों के लिए भी लोग दफ्तर के चक्कर काटने को विवश हैं। कार्यालय के इस तरह रामभरोसे चलने से शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। एक तरफ जहां सरकार पशुपालकों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार कर्मचारियों की गैर-हाजिरी से यह योजनाएं केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं।





