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संत अशोकानंद जी महाराज ब्रह्मलीन, अंतिम यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
गुरुवार को दुनावा में निकली अंतिम यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई
दुनावा। संत 1008 अशोकानंद जी महाराज (बाबाजी) के ब्रह्मलीन होने की खबर से मुलताई सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शोक की लहर है। महाराज पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। बुधवार को उनके ब्रह्मलीन होने की खबर सामने आते ही उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं में शोक व्याप्त हो गया। आध्यात्मिक क्षेत्र में विशेष पहचान रखने वाले महाराज लंबे समय से लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हुए जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करते रहे।
महाराज का 9 अंक से विशेष जुड़ाव बताया जाता था। संयोगवश 9 सितंबर को ही उनके ब्रह्मलीन होने से श्रद्धालुओं के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा रही। जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पंवार सहित क्षेत्र के अनेक लोग उन्हें अपना गुरु और आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानते थे। दुनावा के समीप शिवधाम पाराखाती तथा मुलताई के सांडिया में उनका आश्रम था, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए पहुंचते थे।
गुरुवार को निकली अंतिम यात्रा
गुरुवार को दुनावा में संत अशोकानंद जी महाराज की अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम दर्शन और विदाई के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पंवार, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीणों सहित आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर संत को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतिम यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने नम आंखों से अपने गुरु को अंतिम विदाई दी। पूरे माहौल में भक्ति और शोक का भाव नजर आया। उनके अनुयायियों ने कहा कि संत अशोकानंद जी महाराज का आध्यात्मिक मार्गदर्शन और उनके विचार लंबे समय तक लोगों के बीच स्मरण किए जाते रहेंगे।




