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महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी में स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल
मुख्य प्रांगण में जगह-जगह गंदगी, आवारा पशुओं की आवाजाही; सफाई व्यवस्था को लेकर मंडी समिति की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बुरहानपुर। महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी के मुख्य प्रांगण में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मंडी परिसर में जगह-जगह गंदगी दिखाई देने, कचरा जमा होने तथा आवारा पशुओं की आवाजाही से मंडी आने वाले किसानों, व्यापारियों और अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल यह है कि मंडी परिसर की नियमित साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से संचालित हो रही है।
मंडी परिसर कृषि उपज की खरीदी-बिक्री का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां प्रतिदिन किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। ऐसे स्थान पर स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण होना जरूरी माना जाता है। यदि मुख्य प्रांगण में कचरा जमा रहता है और नियमित सफाई नहीं होती है तो इससे परिसर की व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ लोगों को असुविधा हो सकती है।
जगह-जगह गंदगी, सफाई व्यवस्था पर सवाल
मंडी के मुख्य प्रांगण में गंदगी की स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। परिसर में कचरा और अन्य अपशिष्ट पदार्थ इधर-उधर पड़े रहने से स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि मंडी जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिसर में नियमित सफाई की व्यवस्था दिखाई देनी चाहिए, ताकि किसानों और व्यापारियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
स्वच्छता केवल कचरा उठाने तक सीमित नहीं है। कचरे का नियमित संग्रहण, उचित स्थान पर निस्तारण, परिसर की सफाई तथा गंदगी दोबारा न फैले, इसके लिए निगरानी भी जरूरी है। यदि इन व्यवस्थाओं में कमी रहती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
आवारा पशुओं की आवाजाही भी चिंता का विषय
मंडी परिसर में आवारा पशुओं की आवाजाही भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। जहां किसान अपनी कृषि उपज लेकर आते हैं, वहां पशुओं की अनियंत्रित आवाजाही से व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके अलावा पशुओं द्वारा परिसर में गंदगी किए जाने की स्थिति में सफाई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
ऐसे में मंडी समिति को यह देखना होगा कि परिसर में आवारा पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी, परिसर की नियमित सफाई तथा कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को प्रभावी बनाना आवश्यक है।
स्वच्छता अभियान के बीच मंडी परिसर की स्थिति पर सवाल
एक ओर शहर और विभिन्न सरकारी संस्थानों में स्वच्छता को लेकर अभियान चलाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कृषि उपज मंडी जैसे महत्वपूर्ण परिसर में गंदगी की शिकायतें सामने आना व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। स्वच्छता अभियान तभी प्रभावी माना जाएगा, जब सार्वजनिक संस्थानों और मंडी परिसरों में भी नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित हो।
मंडी परिसर में आने वाले किसानों का कहना है कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को समय-समय पर परिसर का निरीक्षण करना चाहिए। केवल सफाई कर्मचारियों की मौजूदगी पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सफाई नियमित रूप से हो रही है या नहीं और एकत्रित कचरे का समय पर निस्तारण किया जा रहा है या नहीं।
किसानों और व्यापारियों को मिलना चाहिए व्यवस्थित वातावरण
कृषि उपज मंडी में किसान अपनी मेहनत की उपज लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें मूलभूत सुविधाओं के साथ साफ-सुथरा और व्यवस्थित परिसर उपलब्ध कराना मंडी प्रशासन की प्राथमिकताओं में होना चाहिए। मंडी में सफाई व्यवस्था खराब होने पर किसानों और व्यापारियों को असुविधा होती है और मंडी की समग्र व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते हैं।
यदि परिसर में नियमित सफाई के लिए ठेका या कर्मचारियों की व्यवस्था है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी यह भी जांच सकते हैं कि निर्धारित कार्य के अनुसार सफाई हो रही है या नहीं। जहां कमी मिले, वहां नियमानुसार संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई अथवा सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
जिम्मेदार अधिकारी करें निरीक्षण
मंडी परिसर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से मौके का निरीक्षण करने और वास्तविक स्थिति की जांच करने की मांग उठ रही है। परिसर में कहां-कहां कचरा जमा हो रहा है, कितनी बार सफाई की जा रही है, कचरे का निस्तारण किस प्रकार हो रहा है और आवारा पशुओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था है—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
साथ ही मंडी समिति को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि परिसर की नियमित सफाई के लिए क्या व्यवस्था निर्धारित है और उसकी निगरानी कौन करता है। यदि सफाई व्यवस्था के लिए बजट या ठेका निर्धारित है तो उसके अनुसार कार्य हो रहा है या नहीं, इसकी भी समीक्षा की जानी चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि मंडी समिति और संबंधित अधिकारी मुख्य प्रांगण में स्वच्छता व्यवस्था की जांच कब कराते हैं और गंदगी की समस्या को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। किसानों और मंडी में आने वाले लोगों की अपेक्षा है कि कृषि उपज मंडी परिसर स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित नजर आए।




