मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर मंडराते संकट का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर देश में एलपीजी गैस का कितना स्टॉक बचा है और क्या आने वाले दिनों में सिलेंडर की किल्लत हो सकती है? इसी बीच सरकार और तेल कंपनियों ने बड़ा अपडेट दिया है। आइए देसी अंदाज़ में समझते हैं पूरा मामला।
देश में LPG का कितना स्टॉक बचा है?
सरकारी सूत्रों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मुताबिक, फिलहाल भारत के पास करीब 15 से 20 दिनों का LPG स्टॉक मौजूद है। सरकार ने सभी रिफाइनरियों को फुल कैपेसिटी पर काम करने के निर्देश दिए हैं ताकि घरों में गैस सप्लाई पर कोई असर न पड़े। हालांकि चिंता की बात ये है कि भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी से ज्यादा LPG विदेशों से मंगाता है। ऐसे में अगर समुद्री रास्तों में दिक्कत बढ़ी तो सप्लाई चेन पर दबाव आ सकता है।
गैस सप्लाई को लेकर क्या है ताज़ा हाल?
अभी तक देश के किसी भी हिस्से से गैस की कमी की खबर नहीं आई है, लेकिन कई शहरों में सिलेंडर की डिलीवरी में 2 से 3 दिन की देरी जरूर देखने को मिल रही है। लोग डर के कारण जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक कर रहे हैं। सरकार अब कतर और खाड़ी देशों के अलावा अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से भी गैस आयात बढ़ाने की तैयारी में जुटी हुई है, ताकि भविष्य में कोई बड़ा संकट न खड़ा हो।
आज क्या हैं घरेलू LPG सिलेंडर के रेट?
11 मई को दाम बढ़ने के बाद आज यानी 12 मई को कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर ₹1100 के पार पहुंच चुका है। मुंबई में इसकी कीमत करीब ₹1098 है, जबकि पटना में सिलेंडर लगभग ₹1200 के आसपास बिक रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर जोरदार मार डाली है। गांव-कस्बों में लोग अब फिर से चूल्हे और लकड़ी की चर्चा करने लगे हैं।
सरकार ने ब्लैक मार्केटिंग पर कसा शिकंजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि गैस सिलेंडर की कालाबाजारी रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाए। सरकार ने साफ कहा है कि अफवाह फैलाकर सिलेंडर जमा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर कमर्शियल सप्लाई घटाकर घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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आम लोगों के लिए क्या है जरूरी सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि लोग घबराकर अतिरिक्त सिलेंडर जमा न करें। जरूरत के हिसाब से ही बुकिंग करें ताकि सप्लाई सिस्टम पर बेवजह दबाव न पड़े। साथ ही गैस की बचत पर भी ध्यान देना जरूरी है। देसी भाषा में कहें तो “जितनी जरूरत, उतना इस्तेमाल” वाला फॉर्मूला ही इस समय सबसे सही माना जा रहा है। आने वाले दिनों में हालात कैसे बदलते हैं, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।





