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48 वर्षों से गणेश उत्सव में विराज रहे भगवान गणेश, शंकर मंदिर में आस्था का सिलसिला आज भी कायम
माता मोहल्ले में सुबह-शाम आरती, संध्या में भजन-कीर्तन से भक्तिमय माहौल
भौंरा। बीजादेही रोड स्थित माता मोहल्ला शंकर मंदिर में इन दिनों गणेश उत्सव की भक्ति अपने पूरे रंग में है। मंदिर में विराजित भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सुबह की आरती से शुरू होने वाला भक्तिमय क्रम शाम की आरती और इसके बाद होने वाले भजन-कीर्तन तक जारी रहता है। महिला, पुरुष और बच्चे उत्साह के साथ इसमें शामिल हो रहे हैं। इस उत्सव की खास बात यह है कि शंकर मंदिर में पिछले 48 वर्षों से गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा विराजित करने की परंपरा लगातार चली आ रही है। छह दशक से कम नहीं, बल्कि करीब पांच दशक से चली आ रही यह परंपरा अब माता मोहल्ले की धार्मिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन गणेश उत्सव के प्रति श्रद्धा और आयोजन की परंपरा कायम रही। गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम भगवान गणेश की आरती की जा रही है। शाम की आरती के बाद भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु भक्ति गीतों के साथ भगवान गणेश का स्मरण करते हैं। मोहल्ले के श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रतिदिन भगवान गणेश को अलग-अलग प्रकार के प्रसाद का भोग लगाते हैं। आरती के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। इससे मंदिर परिसर में सुबह शाम धार्मिक वातावरण बना रहता है और उत्सव में मोहल्ले के लोगों की सामूहिक सहभागिता दिखाई देती है।
पिछले 48 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में कई पीढ़ियां गणेश उत्सव का हिस्सा बन चुकी हैं। मंदिर समिति के अनुसार, कोरोना महामारी जैसी परिस्थितियों के दौरान भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापना और उत्सव की परंपरा में विराम नहीं आया। यही निरंतरता इस आयोजन को खास बनाती है। वर्तमान में भी महिलाएं, पुरुष और बच्चे नियमित रूप से आरती और भजन में शामिल हो रहे हैं। गणेश उत्सव के दौरान आगामी दिनों में विशेष धार्मिक आयोजन भी होंगे। मंदिर में महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जबकि चौदस के दिन हवन-पूजन के बाद भंडारे का आयोजन होगा। उत्सव के समापन पर भगवान गणेश की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा और इसके बाद धूमधाम के साथ विसर्जन किया जाएगा।
मंदिर समिति के संजीव राठौर ने बताया कि शंकर मंदिर में पिछले 48 वर्षों से गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा विराजित की जा रही है। कोरोना महामारी के दौरान भी यह परंपरा जारी रही। इस वर्ष भी सुबह-शाम आरती, शाम को भजन-कीर्तन और प्रतिदिन भगवान गणेश को प्रसाद का भोग लगाया जा रहा है। चौदस को हवन-पूजन के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा का धूमधाम से विसर्जन किया जाएगा।





