Ladakh Violence:लद्दाख के लेह में हाल ही में हुई हिंसा के बाद हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। कई इलाकों में कर्फ्यू लागू है और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बीच लद्दाख के डीजीपी डॉ. एसडी सिंह जमवाल ने हिंसा पर बड़ा बयान दिया और गंभीर आरोप लगाए।
24 सितंबर को भड़की थी हिंसा
लद्दाख DGP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 24 सितंबर 2025 को एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। उन्होंने बताया कि लद्दाख के इतिहास में पहले कभी इतनी बड़ी हिंसा नहीं हुई। जगह-जगह आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव हुआ। इस दौरान चार लोगों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में पुलिस, सीआरपीएफ और नागरिक घायल हुए।
जवान की रीढ़ टूटी, महिला अफसर फंसीं
डीजीपी जमवाल ने जानकारी दी कि हिंसा के दौरान सीआरपीएफ के जवानों पर बेरहमी से हमला किया गया। एक जवान की रीढ़ की हड्डी टूट गई और वह अस्पताल में भर्ती है। वहीं, चार महिला पुलिस अधिकारी उस समय एक इमारत में फंसी हुई थीं जब भीड़ ने उसे आग के हवाले कर दिया। उन्होंने बताया कि आत्मरक्षा में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई।
‘सो-कॉल्ड एक्टिविस्ट’ ने भड़काया माहौल – DGP
डीजीपी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सो-कॉल्ड पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भड़काऊ भाषण दिए, जिससे हालात बिगड़े। उन्होंने सीधे तौर पर सोनम वांगचुक का नाम लिया और कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार के साथ चल रही बातचीत को पटरी से उतारने का काम किया। वांगचुक और उनके साथियों ने आंदोलन को हिंसक रूप देने की कोशिश की।
6 हजार लोगों ने सरकारी दफ्तरों पर बोला धावा
लद्दाख DGP के अनुसार, हिंसा के दिन 5,000–6,000 लोगों की भीड़ ने सरकारी इमारतों और राजनीतिक दलों के दफ्तरों पर हमला कर दिया। एक राजनीतिक दल का दफ्तर जला दिया गया और सुरक्षा बलों पर पथराव किया गया। इस दौरान दर्जनों सुरक्षाकर्मी और नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए।
सोनम वांगचुक NSA के तहत गिरफ्तार
हिंसा भड़काने के आरोप में सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें लद्दाख से हिरासत में लेने के बाद जोधपुर सेंट्रल जेल भेजा गया है। वांगचुक की गिरफ्तारी लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और भाजपा कार्यालय को भी आग के हवाले कर दिया गया था।





