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आमला। अन्नदाता पर ‘पावर’ का प्रहार बोरदेही में 10 घंटे के आदेश कागजी, हकीकत में कटौती और मनमानी से किसान बेहाल

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खबरवाणी

आमला। अन्नदाता पर ‘पावर’ का प्रहार बोरदेही में 10 घंटे के आदेश कागजी, हकीकत में कटौती और मनमानी से किसान बेहाल

हथनोरा-माडई फीडर का संकट मेंटेनेंस के नाम पर रोज काटी जा रही बिजली, समय पर सिंचाई न होने से सूख रही फसलें

आमला । मध्य प्रदेश शासन की ओर से किसानों को खेती और सिंचाई के लिए रोजाना 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के सख्त निर्देश हैं, लेकिन आमला तहसील के बोरदेही विद्युत केंद्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में जमीनी हकीकत इसके उलट है। यहाँ हथनोरा और माडई फीडर से जुड़े कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कटौती एक बड़ी मुसीबत बन गई है। विभाग द्वारा की जा रही अघोषित कटौती और मनमानी के चलते रबी की फसलों की सिंचाई समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडराने लगा है।

समय की ‘डकैती’: आधा घंटा देरी से शुरू, आधा घंटा पहले बंद

किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि विभाग द्वारा बिजली देने के समय में भी हेरफेर किया जा रहा है। शासन ने दो पालियों में बिजली देने की व्यवस्था की है, लेकिन दोनों ही शिफ्टों में किसानों को पूरा समय नहीं मिल रहा। बिजली शुरू होने के निर्धारित समय से आधा घंटा देरी से सप्लाई दी जाती है और बंद करने के समय से आधा घंटा पहले ही बिजली काट दी जाती है। इस तरह रोजाना एक घंटा बिजली विभाग खुलेआम काट रहा है। किसानों का कहना है कि पंपों को चलाने और खेतों के आखिरी छोर तक पानी पहुँचाने में समय लगता है, ऐसे में बार-बार की कटौती सिंचाई की लय बिगाड़ देती है।

मेंटेनेंस और ओवरलोड का ‘पुराना बहाना

जब भी किसान कटौती की शिकायत लेकर विद्युत केंद्र बोरदेही पहुँचते हैं, तो उन्हें मेंटेनेंस या सिस्टम पर ओवरलोड होने का रटा-रटाया जवाब थमा दिया जाता है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि अगर मेंटेनेंस का काम इतना ही जरूरी है, तो वह खेती के सीजन से पहले क्यों नहीं पूरा किया गया? सिंचाई के ऐन वक्त पर घंटों बिजली गुल रखना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

किसानों का आक्रोश: लागत निकालना भी हुआ मुश्किल

धनीराम यादव, अशोक सिंह रघुवंशी, अनूप सिंह रघुवंशी, बालू यदुवंशी , देवेंद्र रघुवंशी सहित अन्य किसानो चर्चा में बताया कि उन्होंने हजारों रुपये कर्ज लेकर, महंगे बीज, खाद और डीजल खरीदकर फसलों की बुआई की है। कृषि पंपों के लिए भारी-भरकम बिजली बिल चुकाने के बाद भी उन्हें हक की बिजली नहीं मिल रही है। बिजली के बार-बार आने-जाने (ट्रिपिंग) के कारण खेतों में लगी मोटर और पंप जल रहे हैं, जिससे किसानों पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पानी के अभाव में पौधों की वृद्धि रुक गई है, जिससे इस साल पैदावार भारी रूप से प्रभावित होने की आशंका है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली विभाग ने अपनी मनमानी बंद नहीं की और नियमित रूप से पूरे 10 घंटे बिजली देना शुरू नहीं किया, तो वे बोरदेही विद्युत केंद्र का घेराव कर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

फसलों पर संकट: लागत निकालना भी हुआ मुश्किल

वर्तमान में फसलों को पानी की सख्त जरूरत है। अगर समय पर सिंचाई नहीं हुई तो उपज में भारी गिरावट आ सकती है। किसानों ने बताया कि उन्होंने महंगे खाद, बीज और कीटनाशकों में भारी निवेश किया है, लेकिन बिजली की आंख-मिचौली ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है। “हमें पूरी बिजली चाहिए, बहाने नहीं,” यह मांग अब हर गांव से उठ रही है।

इनका कहना है
विद्युत केंद्र बोरदेही जे ई
संतोष चंदेलकर
9589006133
खबर के संबंध में फोन के माध्यम संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन अधिकारी द्वारा फोन नहीं उठाया जा रहा है

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