खबर वाणी, महेश प्रजापति की ग्राउंड रिपोर्ट
आमला नगर पालिका में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की पोल खोलती धरातल की हकीकत।
आमला, जिला बैतूल:
देश भर में स्वच्छता को बढ़ावा देने और जन-जन को जागरूक करने के लिए भले ही ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत विज्ञापनों और अभियानों पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा हो, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है। ताजा मामला मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के आमला शहर का है, जहां प्रशासनिक दावों और कागजी स्वच्छता अभियानों की पोल खुलकर सामने आ गई है।
वीआईपी आगमन मार्ग के पास गंदगी और अतिक्रमण
प्राप्त जानकारी और तस्वीरों के अनुसार, आमला शहर में प्रभारी मंत्री के संभावित आगमन स्थल से महज 20-25 फीट की दूरी और वीआईपी मार्गों के पास फैली गंदगी ने सरकारी दावों की हवा निकाल दी है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस मार्ग या क्षेत्र से प्रदेश के प्रभारी मंत्री का गुजरना या आगमन होना है, वहां से चंद कदमों की दूरी पर फैली गंदगी प्रशासनिक अमले की उदासीनता को उजागर करती है।
नगर पालिका परिषद आमला द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक बेंच के ठीक सामने और आसपास कचरे का अंबार लगा हुआ है। इस स्थल पर बिखरे पड़े कागज, पन्ने, सूखे तिनके और डिस्पोजेबल बर्तन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां साफ-सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
थाना मुख्य द्वार और श्रीराम मार्केट के पास अतिक्रमण व कबाड़ का साम्राज्य
ठीक थाना आमला के मुख्य प्रवेश द्वार एवं श्रीराम मार्केट में थाना परिसर के मार्ग पर सरकारी भूमि और सड़क किनारे लावारिस हालत में कबाड़ का अंबार लगा हुआ है। आवाजाही के रास्ते में कई दिनों से कबाड़ और पुरानी साइकिलें खड़ी कर साइकिल स्टोर वाले ने अवैध कब्जा कर लिया है, जो क्षेत्र के सौंदर्यकरण को मुंह चिढ़ा रहा है। मुख्य प्रवेश द्वार और आवाजाही मार्ग पर इस तरह की गंदगी व अतिक्रमण से शहर की सुंदरता धूमिल हो रही है।
जनता में भारी रोष और सवाल।
गांधी-शास्त्री जयंती और स्वच्छता सप्ताह जैसे आयोजनों के दौरान कागजी दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आती है। जब वीआईपी दौरों और महत्वपूर्ण प्रशासनिक मार्गों के पास सफाई व्यवस्था का यह हाल है, तो आम बस्तियों और भीतरी वार्डों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जब वीआईपी आगमन के तय स्थलों के पास इस तरह की गंदगी पसरी हुई है, तो आम रिहायशी इलाकों और वार्डों का क्या हाल होगा।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें।
त्वरित सफाई अभियान:
वीआईपी मार्गों के साथ-साथ पूरे शहर से कचरे के ढेरों और गंदगी को तुरंत हटाया जाए।
अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई।
शासकीय भूमि और सड़क किनारे अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठे कबाड़ संचालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
जवाबदेही तय हो।
स्वच्छता के नाम पर बजट की बर्बादी रोकने के लिए लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि शहर को वास्तव में स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सके।
शहरवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन व आमला नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि इस प्रकार की गंभीर लापरवाही पर तुरंत संज्ञान लिया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।





